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क्या है महाभियोग और क्या इसीलिए विपक्ष के निशाने पर हैं मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा!

महाभियोग क्या है?

जब किसी बड़े अधिकारी या प्रशासक पर सदन के समक्ष अपराध का दोषारोपण होता है तो इसे महाभियोग कहते हैं। महाभियोग वो प्रक्रिया है जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जजों को हटाने के लिए किया जाता है. इसका ज़िक्र संविधान के अनुच्छेद 61, 124 (4), (5), 217 और 218 में मिलता है. महाभियोग प्रस्ताव सिर्फ़ तब लाया जा सकता है जब संविधान का उल्लंघन, दुर्व्यवहार या अक्षमता साबित हो गए हों.

न्यायाधीश को कैसे हटाया जा सकता है?

अनुच्छेद 124(5) में न्यायाधीश की पदच्युत की प्रक्रिया वर्णित है तथा न्यायाधीश अक्षमता अधिनियम 1968 के अनुसार-

  • संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव लाया जा सकता है।लोकसभा में 100 तथा राज्यसभा में 50 सदस्यों का समर्थन अनिवार्य है।
  • प्रस्ताव मिलने के बाद सभापति 3 लोगों की जाँच समिति बनाता है जिसमें एक सुप्रीम कोर्ट का कार्यकारी जज एक हाईकोर्ट का मुख्य कार्यकारी जज और एक वरिष्ठ विधिवेता शामिल होता है।

यदि जांच में न्यायाधीश दोषी पाया जाता है तो सदन में न्यायाधीश को हटाने के लिए प्रस्ताव लाया जाता है जिसे दोनों सदन को 2/3 सदस्यों के बहुमत से पारित करना होता है,सदन प्रस्ताव पारित करने को बाध्य नही होता और अगर जांच समिति न्यायाधीश को दोषी नही पाता तो पुरी प्रक्रिया वहीं खत्म हो जाता है।

क्यों राजनीतिक निशाने पर हैं सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ?

मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग लाने की प्रक्रिया की तह में अन्य जजों का उनके खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस और तत्कालीन लोया मामले की जांच को अपने नजदीकी जज को सौंपने का मामला तूल पकड़ रहा है।अन्य जजों का आरोप है की मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा अपने करीबी लोगों को कई महत्वपूर्ण जांच सौंपते हैं। लेकिन मामला थोड़ा ज्यादा पेचीदा और राजनीतिक है।आइए देखते हैं की कौन से मामले अभी मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के पास है :

  1. बाबरी-मस्जिद सह राम जन्मभूमि मामला
  2. जम्मू काश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे(अनुच्छेद 370) का मामला
  3. जजों की नियुक्ति का मामला
  4. आधार स्कीम की वैधता का मामला

यहाँ पर प्रथम दो मामलों का राजनीतिक निहितार्थ बहुत अधिक है।अगर तत्कालिक बीजेपी की मोदी सरकार इनमें से एक मुद्दे में भी सुप्रीम कोर्ट से फैसला लेने में सफल होती है,तो आनेवाले 2019 के लोकसभा के चुनाव में उसे अन्य राजनीतिक दलों से काफी बढत मिल सकती है और शायद यही वो मामले हैं जिसपर कांग्रेस और अन्य दल 2019 तक फैसला नही देखना चाहतें है।दूसरा कारण न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर निशाना साधने का,सरकार पर परोक्ष रूप से दबाव बनाने को लेकर है,सरकार पर आरोप है की वो न्यायपालिका को लगातार प्रभावित कर रही है।

जहाँ तक महाभियोग कि बात है तो प्रथम जांच में दोषी होने के बाद भी सदन में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ 2/3 सदस्यगण का समर्थन विपक्ष दोनों सदनों में नहीं जुटा सकती है अतः यह पुरा मामला न्यायपालिका और सरकार पर राजनीतिक दबाव के अलावे कुछ भी नही है।

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