राजनीति

बीजेपी के पास तुरुप का वो इक्का है जिसके सामने विपक्ष 2019 में धराशाई हो जाएगी

उत्तर प्रदेश में ठंड ने दस्तक दे दी है लेकिन यूपी की राजनीति गर्माने लगी है, 2019 के सेमिफाइनल यानी पांच राज्यों के चुनाव का एलान हो चुका है, सियासी बिसात बिछ चुकी है. लेकिन इस सबके बीच उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण है. ये देश की हर पार्टी जानती है, इसीलिए बुधवार को बीजेपी के चाणक्य अमित शाह लखनऊ पहुंचे थे और 2019 फिर से फतह करने के लिए मंथन किया है.

ये वो वक्त है जब हिंदुस्तान की सियासत उस मोड़ पर खड़ी है जहां हार जीत ही नहीं साख और सम्मान भी दांव पर लगा है, देश की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी किसी भी कीमत पर सिंघासन छोड़ना नहीं चाहती, और विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस हर कीमत पर सिंघासन तक पहुंचना चाहती है और इस घमासान में सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है महागठबंध का नारा, सभी विपक्षियों के इस गठबंधन की एक ही कोशिश है मोदी को रोकना,

लेकिन ये इतना आसान होता तो बीजेपी सत्ता में ना बैठी होती. बीजेपी के पास तुरुप का वो इक्का है जिसके सामने विपक्ष की हर रणनीति धराशाई हो गई. ये एक बार नहीं कई बार हुआ. एक बार फिर अमित शाह अपनी चाणक्य नीति से 2019 की रणनीति बनाने के लिए नबावों के शहर लखनऊ पहुंचे थे. करीब 9 घंटे चली इस बैठक में शाह के साथ संघ और बीजेपी के नेताओं का मंथन हुआ.

माना जा रहा है चाणक्य अमित शाह यहां उत्तप्रदेश में लोकसभा चुनाव की रणनीति को दिशा दी है. यहां से संघ और बीजेपी के नेताओं की तरफ से जमीनी स्तर से आए फीडबैक के आधार पर यूपी में आगे की रणनीति को रास्ता दिया गया है. उत्तर प्रदेश में अमित शाह का ये दौरा उस समय है जब उत्तर प्रदेश में राम मंदिर बनाने की आवाज़ फिर से बुलंद हो रही है, दूसरी बात उत्तर प्रदेश से ही 2019 में महागठबंधन की तैयारी हो रही है,

तो ऐसे में अमित शाह का लखनऊ आकर मंथन करने का फैसला बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि हर अनसुलझी पहेली, बिगड़े हुए गणित को सुलझाने की काबीलियत, मतलब हर फन में माहिर चाणक्य अमित शाह हर हालात से निपटने के लिए मंथन करने आए थे.

संघ और बीजेपी ने जीत का क्या फॉर्मूला निकाला ?

ये दरबार लखनऊ के आनंदी वाटर पार्क में सजा था. ये बैठक महत्वपूर्ण इसलिए हो जाती है क्योंकि इसमें संघ के कई बड़े नेता शामिल हुए. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा दोनों उपमुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा भी शामिल थे. इसके साथ और भी यूपी कैबिनेट के कई मंत्री मौजूद थे. कहते हैं केंद्र की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है .

2014 में बीजेपी इसी रास्ते को फतह करके सत्ता पर पूर्ण बहुमत के साथ विराजमान हुई थी. पिछले चुनाव की तर्ज पर 2019 में फिर से जीत दोहराने के लिए चाणक्य लखनऊ आए थे. दिल्ली की सत्ता का रास्ता अगर उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है, तो इसके पीछे देश का राजनीतिक इतिहास है. यूपी ने अब तक सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री दिए हैं, प्रदेश में 80 लोकसभा सीटें हैं, यानी केंद्र में सरकार बनाने के लिए जितनी सीटें चाहिए उसकी करीब एक तिहाई, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने सूबे की 80 लोकसभा सीटों में 73 जीती थीं,

उत्तर प्रदेश से मिली बड़ी जीत के बाद बीजेपी का मिशन 272 प्लस कामयाब हो पाया था, इतनी बड़ी जीत से साथ सत्ता में आई बीजेपी 2014 से अब तक उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनावो में ज्यादा तर हारी है. फूलपुर, गोरखपुर और कैराना जैसे हालातों से फिर से सामना ना हो इसलिए चाणक्य उत्तर प्रदेश आए हैं. और उनका एक ही मकसद है, 2019 में फिर से दिल्ली के सिंघासन पर कब्जा, इस फतह के लिए अमित शाह मैदान में उतर चुके हैं और इसकी एंट्री उन्होंने उत्तर प्रदेश से की है.

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