राजनीति

राम मंदिर पर प्राइवेट बिल लायेंगे राकेश सिन्हा, भाजपा सांसद का कड़ा विरोध

हालिया दिनों में राम मंदिर पर राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के उदासीनता को देखते हुए अलग कोशिशें शुरू हो गई है. अबतक न्यायपालिका के भरोसे बैठे राम मंदिर समर्थकों की उम्मीदें टूट रही हैं. ऐसे में मंदिर निर्माण का वादा कर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी के लिए परेशानियां खड़ी होनें वाली है. 2019 में लोकसभा चुनाव है.

अगर भाजपा नें अपना वादा पूरा नहीं किया तो उसे अपनें बड़े वोट बैंक केखिसकनें का डर है. बीजेपी समर्थक रहे साधु संतो के विरोध से यह बात स्पष्ट भी होनें लगी है. ऐसे में अब भाजपा और संघ नें मिलकर विधायी प्रक्रिया द्वारा मंदिर निर्माण का रास्ता तलाशना शुरू करदिया है. संघ प्रचारक और राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा राम मंदिर पर एक प्राइवेट मेंबर बिल लेकर आ रहे हैं.

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उन्होनें कल एक ट्वीट करते हुए कहा कि 'जो लोग बीजेपी और संघ को उलाहना देते रहते हैं कि राम मंदिर की तारीख बताएं, उनसे सीधा सवाल है कि क्या वे मेरे प्राइवेट मेंबर बिल का समर्थन करेंगे? समय आ गया है दूध का दूध पानी का पानी करने का।' उन्होंने इस ट्वीट में राहुल गांधी, अखिलेश यादव, सीताराम येचुरी, लालू प्रसाद यादव और चंद्रबाबू नायडू जैसे विपक्षी नेताओं को भी टैग किया था।

तेजतर्रार विचारक की छवि रखनें वाले सिन्हा नें यह दाँव खेलकर जहाँ एकतरफ भाजपा के लिए संजीवनी बूटी का काम किया है वहीं दूसरी तरफ निश्चिंत बैठे विपक्षी नेताओं के माथे पर पसीना ला दिया है. विपक्ष की परेशानी यह है कि वह अगर बिल का समर्थन करती है तोमुस्लिम वोट बैंक चला जायेगा. जबकि फायदा केवल भाजपा को होगा.

वहीं अगर नहीं करते हैं तो हिन्दू समाज से वोट नहीं मिलेगा. हालांकि सिन्हा के इस दाँव का खुद भाजपा की सांसद सावित्रीबाईफूले नें हीं विरोध किया है. उन्होनें कहा कि 'सिन्हा का यह कदम आने वाले लोकसभा चुनाव में राजनीतिक फायदा उठाने के लिए की जा रही एक साजिश का हिस्सा है। मैं ऐसे कदम के विरोध में किसी भी हद तक जाऊंगी, जिससे संविधान को खतरा हो।'.

उनकी बातों को भाजपा इसलिए भी ज्यादा तवज्जो नहीं देती क्योंकि वह लगातार पार्टी के रूख के उलट बयान देती रहती हैं. इससे पहलेफूले नें हीं कहा था कि अयोध्या में खुदाई के दौरान भगवान बुद्ध की मूर्तियाँ मिली थी इसलिए वहाँ बौद्ध मंदिर बनना चाहिए. हालांकि इसके अलावा भाजपा के अंदर इस प्राइवेट मेंबर बिल का विरोधहोनें की संभावना नही के बराबर है.

संसद के शीतकालीन सत्र में पता चलेगा  प्राइवेट मेंबर बिल में कितना दम

संसद के शीतकालीन सत्र में पता चलेगा कि सिन्हा के प्राइवेट मेंबर बिल कितना दम है. और बाकी पार्टियाँ इसपर कैसा रूख रखती हैं. इससे पहले सुप्रीम कोर्टके पूर्व जज जस्टिस चेलमेश्वर नें कहा है कि संसद में कानून बनाकर सरकार राम मंदिर बिल पास करा सकती है. ऐसे कई उदाहरण हैं जब न्यायपालिका के निर्णय को पलटनें के लिए सरकारें बिलपास कराकर कानून बनाती रही हैं.

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