सुषमा स्वराज | sushma swaraj you will be missed
राजनीति

सुषमा जी, आप बहुत याद आयेंगी!

6 अगस्त की शाम को पूरे देश में जश्न मनाया जा रहा था। खुशी थी कश्मीर से धारा 370 के हटने की। लड्डू और मिठाइयां बांटी जा रही थी। लेकिन उसी समय‌ भारतीय राजनीति की सबसे बेहतरीन नेत्री को अपने अंतिम समय का अहसास हो गया था। रात तकरीबन 8 बजे पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का ट्वीट आया " प्रधानमंत्री जी, आपका हार्दिक अभिनंदन। मैं अपनें जीवन में इसी दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी"।

किसी को इस ट्वीट से ऐसा आभास नहीं हुआ कि क्या कुछ होने वाला है। लेकिन एक इंसान को इसका पता था, वह थीं खुद सुषमा स्वराज। शायद उन्हें अपने जाने का पूर्वाभास हो गया था। कुलभूषण जाधव मसले पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में केस लड़ने वाले वकील हरीश साल्वे ने एक टीवी एंकर से बात करते हुए बताया कि 'उनकी 8.50 बजे सुषमा जी से बात हुई, उन्होंने उन्हें अपना फीस एक रूपए लेने को कहा'।

दरअसल साल्वे नें केस के लिए केवल एक रूपए फीस लिया था। रात नौ बजे उन्होंने खाना खाया और फिर टीवी देखने लगीं। लेकिन इसी समय कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। सुषमा स्वराज को दिल का दौरा पड़ा। उन्हें एम्स ले जाया गया लेकिन यह उन्हें हमसे जुदा करने से रोकने के लिए काफी नहीं था।

6 अगस्त की यह रात मनहूस है। यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है, पहले धारा 370 हटने की खुशी से लबरेज सुषमा स्वराज ट्वीट करती हैं जबकि एक घंटे बाद वह सदा के लिए आँखें बंद कर लेती हैं। जिसने सुना,वह स्तब्ध था। ऐसा लगा मानो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई हो। आँख से आंसुओं का सैलाब निकल पड़ा। वह लाखों युवाओं की रोल मॉडल थीं, वह देश के हर बच्चे की 'माँ' थीं। वह अपने से छोटों के लिए 'दीदी' थीं। वह अपने से बड़ों के लिए 'छोटी बहन' थीं। इसलिए तो आज हर भारतीय के आँखों में आँसू की धारा बह रही है,जो रूकने का नाम नहीं लेती।

सुषमा स्वराज के व्यक्तित्व और काम करने के तरीके को समझना जरूरी है। 8 जून 2017 की सुबह का एक ट्वीट आता है। ट्वीट अंग्रेजी में था लेकिन इसका हिंदी अर्थ था 'अगर आप मंगल ग्रह पर फँस गए हों, भारतीय दूतावास वहाँ भी मदद करने के लिए मौजूद रहेगा'। यह किसी और ने नहीं, उस समय देश की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज नें ट्वीट किया था। विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने एक नई मिसाल कायम की। जब भी देश के बाहर कोई भारतीय फंसा होता, बस एक ट्वीट करने की देर थी, उसके समस्या का समाधान कर दिया जाता था। कोई ट्वीट करता था कि बोटिंग करते वक़्त मेरा पासपोर्ट गिर गया पानी में, कुछ किजिए। तुरंत एक्शन लेती थीं सुषमा स्वराज। ऐसा पहले कब हुआ था, जवाब है 'कभी नहीं'।

अटल जी की सरकार में केवल 13 दिन सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहीं लेकिन उस 13 दिनों में उन्होंने ऐतिहासिक फैसला कर दिया। फिल्म उद्योग को उन्होंने उद्योग घोषित करवाया जिसके बाद फिल्मों के लिए बैंक से लोन मिलने लगे।

जब दक्षिणी राज्यों में जगह बनाने के लिए भाजपा संघर्ष कर रही थीं। कर्नाटक के बेल्लारी से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ लड़ने के लिए भेजा गया सुषमा को। केवल 15 दिनों में कन्नड़ सीख फर्राटेदार भाषण देने लगीं। भले हीं वह चुनाव हार गईं लेकिन उन्हीं की रखी नींव है जिसपर भाजपा आजतक उसके बाद बेल्लारी सीट नहीं हारी। और आज राज्य की सत्ता में भी है।
चाहे वह भाजपा की नेत्री रही हों लेकिन किसी भी दल में उनका विरोध सुनने को नहीं मिलेगा।

पत्रकार उनकी लाख आलोचना करें, लेकिन वह उसी आत्मीयता से मिलती थी जैसे कुछ हुआ हीं न हो। संयुक्त राष्ट्र संघ के जनरल असेंबली में सुषमा स्वराज ने जब पाकिस्तान की आतंकवाद पर बखिया उधेड़ी थी। तब हर भारतीय अपने छाती को चौड़ा महसूस कर रहा था। जब वह भाषण देती थी तब लगता था कि वाकई में हमने एक अनमोल रत्न पाया है।

जब-जब भारतीय जनता पार्टी अपनें संगठन को कमजोर महसूस करेगी, सुषमा जी आप बहुत याद आयेंगी। जब भी आप ट्विटर खोलेंगे तो सुषमा जी के ट्वीट की कमी दिखेगी। जब कभी विदेशों में भारतीय फँसे होंगे,उन्हें मदद की जरूरत होगी, सुषमा जी बहुत याद आयेंगी। जब जब गंदी राजनीति होगी, राजनीति का स्तर गिरते दिखेगा, सुषमा जी याद आयेंगी। जब भी पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना होगा, सुषमा जी आप बहुत आओगे।

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Ankush M Thakur
Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator
http://www.thenationfirst.com

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