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सऊदी अरब नें अपनें तुर्की दूतावास में पत्रकार को मार डाला

लगातार बढ़ते राजनीतिक वैश्विक दबाव के बीच सऊदी अरब नें आखिरकार मान लिया है कि लापता पत्रकार जमाल खाशोज्जी की मौत हो चुकी है. दो सप्ताह बाद देश के सरकारी टीवी चैनल नें इस बात की पुष्टि कर दी है. चैनल की रिपोर्ट के अनुसार तुर्की के इस्तांबुल स्थित सऊदी के वाणिज्यिक दूतावास में एक झड़प के बाद जमाल की मौत हो गई है. हालांकि उनके बॉडी को बरामद करनें के लिए तुर्की की इंटेलिजेंस टीम जुटी है जिसके जंगल में ठिकानें लगानें की खबरें हैं. जाँच के दौरान इस मामले में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सहयोगी साउद अल कथानी और डिप्टी इंटेलिजेंस चीफ अहमद अल असीरी को बर्खास्त कर दिया गया है. हालांकि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान लगातार तुर्की सरकार के साथ मिलकर जाँच करवा रहे हैं.

क्या है पूरा मामला

सऊदी अरब निवासी जमाल खाशोज्जी की गिनती नामी पत्रकारों में होती है. वे अभी वाशिंगटन पोस्ट के लिए कॉलम लिखते थें. दो सप्ताह पहले 2 अक्टूबर को वे अपनी मंगेतर हदीजी जेनगिज के साथ शादी की जरूरी ऑफिशियल पेपर के सिलसिले में सऊदी दूतावास गए लेकिन वहाँ से लौट कर नहीं आ पाए. उनकी मंगेतर कहती हैं कि मैं बाहर उनका इंतजार करती रह गई लेकिन वे नहीं लौटे. अमेरिका सहित दुनिया के ज्यादातर देशों को लगता है कि सऊदी शाही परिवार के इशारे पर उनकी हत्या कर दी गई. इसका कारण है कि 80 के दशक में पत्रकारिता में आनेंवाले खाशोज्जी सऊदी शाही परिवार के कड़े आलोचक रहे हैं, जिसकी सजा उन्हें भुगतनी पड़ी है. 11 सितंबर को वाशिंगटन पोस्ट में छपे उनके आखिरी कॉलम में प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की यमन वार के लिए आलोचना की गई थी. यह कॉलम था 'Saudi Arabia’s crown prince must restore dignity to his country — by ending Yemen’s cruel war' मतलब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस को यमन में लड़ाई खत्म कर अपनें देश का गौरव वापस लौटाना चाहिए.

कौन हैं जमाल खाशोज्जी:-

1980 में एक लोकल चैनल के रिपोर्टर के तौर पर काम शुरू करनें वाले जमाल नें सोवियत संघ द्वारा अफगानिस्तान पर आक्रमण की रिपोर्टिंग की. 1980 से 90 के बीच उन्होनें अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का कई बार इंटरव्यू लिया. उन्होनें कई बड़ी घटनाओं को कवर किया जिसमें खाड़ी युद्ध प्रमुख है. शाही परिवार की आलोचना के कारण उन्हें ना तो अल वतन में ज्यादा दिन नौकरी रही ना हीं अरब न्यूज में. इसके अलावा उन्हे कई बार देश निकाला गया. इसके बाद वे अमेरिका में अरब राजदूत प्रिंस तुर्की बिन फैसल के साथ काम करनें लगे. 2016 में उन्होनें आरोप लगाया था कि डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ लिखनें के कारण उनके ट्विटर अकाउंट को बंद करानें की कोशिशें हुई. जिसमें 1. 8 मिलियन फॉलोअर थे.

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Ankush M Thakur
Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator
http://www.thenationfirst.com

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