व्यंग

व्यंग: मरण दिन नाहीं ऊ त ज़बह दिन होवत

स आदमी की समय की सुरुआत तो तब होती है जब कोई कहे भैया छोटके नानाजी के पत्नी लटकल बा और तब समझ में आती है की उस बेचारी के लिए एक एक पल कितना भारी पर रहा होगा और तो और उसे जाने का मन हो ना हो लेकिन हम तो जबरदस्ती मन्नत मांगते है कि बुढ़िया को बहुत कस्ट हो रहा है भगवान उसे जल्दी उठा लो लेकिन वो मन्नत भी ऐसा होता है की हम भगवान से कोई वादा नहीं करते और भला जब किसी चीज को करने केलिए कुछ मिले ही नहीं तो वो काम भला कौन करे ? फिर भला भगवान भी कहाँ सुनने वाला वो भी मन मार के सुन लेते हैं और मन ही मन कहतें हैं अब देख बिना कुछ दिए हमें जगाने का दंड कैसा होता है और वो बूढी नानीजी को बिस्तर पर गए हुए लगभग दो महिना हो चला है बेचारी बहु सामने तो सेवा करती है लेकिन एकांत में कब जाएगी ये बुढ़िया सरदर्द बनगई है हे भगवान इस बुढ़िया को उठाते क्यों नहीं एक दिन तो हद ही हो जाती है बेचारी नानीजी को रात में कपरो में ही सौच हो जाता है लेकिन बेचारी बहु तो तंग जो आ चुकी है उस बुढ़िया से. तो छोड़ देती है उसे यूं ही सौच में बेचारी गूंह गीजती हुई नानीजी

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उधर से बेटे का रिएक्सन प्रिया तूने माँ को ऐसे कैसे छोड़ दिया हाँ मैंने छोड़ दिया जा जाके अब तू कर बहुत हो गया ये अब नहीं हो गा मुझ से मै अपने मायके जा रही हूँ संभाल अपना घर अरे भाग्यवान डार्लिग तू ऐसे कैसे कर सकती हो मै सही कह रही हूँ मै जा रही हूँ बुढ़िया मर जाए तो ख़बर कर देना

अब जब पड़ोसी देखने आती है तो उन पड़ोसियों का रिएक्सन तो देखते ही बनती है ए बहिन इ बुढ़िया बहुत पाप किया है उ तो भोगना ही पड़ेगा ही ना हाँ अब देखो ना बहु भी छोड़ के चली गई अब तो और कस्ट ही कस्ट उधर से एक माता जी घुसकते हुए नानीजी के पास आती है और कहती है ए ननकी भौजी ननकी भौजी बहुत कस्ट हो रहा है क्या करोगी जो पाप किये हो वो तो भोगना ही पड़ेगा बेचारी नानीजी क्या बोले बस एक टक देख ही सकती थी वैसे भी बोलने केलिए कुछ रह ही कहाँ गया था

संयोग देखिए उसी सुबह नानीजी अल्लाह को प्यारे हो जाते है लोगो की भीड़ लगती है बहु आती है और दहारे मार मार कर रोती है तुम हमें छोड़ कर कहाँ चली गई और ना जाने क्या क्या और हाँ अजब की बात तो तब देखि जाती है जब वही पड़ोसी जो कल बुढ़िया को पापी कह के गई थी आज कह रही है ननकी भौजी ने बहत पुण्य किया था जो उसे ऐसी मौत मिली. एक दम ब्रह्म मुहूर्त में मरी है और दिन भी गुरुवार.......................!!!

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Pushpam Savarn
pushpam is a content creator and a journalist
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