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कभी कुंबले के दीवाने रहे विराट को अब पसंद नहीं उनका साथ!

भारतीय क्रिकेट बोर्ड नें काफी मेहनत और मशक्कत के बाद पिछले साल 23 जून को अगले एक साल के लिए टीम के मुख्य कोच का नाम घोषित किया| इस पोस्ट को पाने वाला वह शख्स था अनिल कुंबले ,जिसने टॉम मूडी, रवि शास्त्री जैसे बड़े नामों को पछाड़कर यह जिम्मेदारी हासिल की.. .. टेस्ट में 619 विकेट लेनें,  भारत की कप्तानी से लेकर कर्नाटक बोर्ड और आईसीसी में मेन पदों पर काम करने के बाद कुंबले, कोच के लिए परफेक्ट नहीं थे, ये सोंचने वालों की भूल थी|
रवि शास्त्री नें भी खूब हल्ला मचाया था कि मुझे कोच क्यों नहीं बनाया गया| लेकिन अंतिम फैसला सचिन, लक्ष्मण और गांगुली को करना था और सचिव अजय शिर्के को बस मीडिया में आकर उगल देना था| कुंबले को देखने समझने वाले जानते हैं कि वे बड़े सभ्य और कूल माइंड आदमी हैं|
18 वर्षों तक उनके टीम में बने रहने के दौरान कोई टीम भारत से डरती थी तो इसका कारण वही थें| कोच बनने के बाद कहा गया कि कप्तान कोहली गर्म और कुंबले ठंढ़े दिमाग के हैं, जोड़ी अच्छी जमेगी..... और फिर जोड़ी चलने भी लगी| पहले वेस्टइंडीज को उसके घर में जाकर 2-0 से टेस्ट हराया तो तारीफ मिली लेकिन टी20 में 1-0 से हार गए, लेकिन अफसोस कम था क्योंकि वेस्टइंडीज तो ऐसे भी वर्ल्ड चैंपियन टी20 टीम थी| वापस लौटे भारत तो न्यूजीलैंड से मुकाबला करना था| मेहमानों को 3-0 से टेस्ट में और 3-2 से वनडे में धोया तो बंग्लादेश को एकमात्र टेस्ट में हरा दिया| कुंबले, कोहली का अश्वमेध घोड़ा निकल पड़ा था|
नवंबर से जनवरी के बीच आई इंग्लैंड की टीम,  टेस्ट में 4-0 से, वनडे में 2-1 से और टी20 में 2-1 से हारकर लंदन के लिए रवाना हो गई| फरवरी मार्च 2017 में ऑस्ट्रेलिया को भी 2-1 से धो डाला| न्यूजीलैंड को हराने के बाद टीम नंबर वन टेस्ट टीम भी बन गई जो अबतक गद्दी संभाले है| अगर किसी कोच के रहते इतना बेहतर रिकॉर्ड हो तो टीम के लिए सोने पर सुहागा है| आईपीएल खत्म होते हीं सभी खिलाड़ी वापस अपने देश के लिए खेलने आ गए चैम्पियंस ट्रॉफी में|
लेकिन इस बार बात बदली हुई है, टीम बदली हुई है.. कुछ खोया खोया सा लग रहा है, रौनक गायब हो गई है,  मोती बिखड़े पड़े हैं| बात यह है कि अनिल कुंबले साहब को बिना बताए बोर्ड नें कोच पद के लिए फिर से आवेदन मँगाने शुरू कर दिए , जिसकी आखिरी डेट 31 मई थी| कुंबले को दुख है कि इतने अच्छे प्रदर्शन के बाद भी उनके कॉन्ट्रैक्ट को बढ़ाया नहीं गया,  लेकिन बोर्ड का कहना है कि कुंबले इसके लिए बढ़ी हुई फीस माँग रहे हैं|
वहीं इस बीच उड़ते उड़ते खबर आई कि कप्तान कोहली नें बोर्ड से कुंबले की शिकायत की थी, यही वजह रही कि करार रिन्यू नही किया गया| कहा गया कि कोहली की शिकायत थी कि अनिल कुंबले , टीम पर अपनी मनमानी कर रहे हैं, अपना सबकुछ थोप रहे हैं, अपना रौब दिखा रहे हैं जिसे संभालना टीम के सीनियर प्लेयर्स के लिए मुश्किल हो रहा है| काफी सारे सीनियर प्लेयर भी नाराज हैं, ऐसे में चैंपियंस ट्रॉफी में टीम को एकजुट रखना बड़ी चुनौती साबित हो रही है| कोहली और कुंबले एक दूसरे से नजर मिलाने से भी कतरा रहे हैं , ऐसे औपचारिकता के लिए तो अभ्यास साथ में कर हीं रहे हैं जिससे लगे की कुछ भी गड़बड़ नहीं है|
लेकिन हकीकत है कि अनिल कुंबले एक सख्त और नियम से चलने वाले इंसान हैं, जिस कारण कोहली और कुछ अन्य खिलाड़ी आजादी नहीं ले पा रहे हैं जो वे चाहते हैं| ऐसे हालात में भला कौन सा खिलाड़ी नये कोच के लिए नहीं कहेगा| कोहली ने वही किया, अब अगर कोई और कोच आयेगा तो वो भी कोहली से दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहेगा| कुंबले के बारे में जैसी शिकायतें मिल रही है, वह उनके चरित्र से बिल्कुल मेल नही खा रहा है|
उनको नजदीक से जानने वाला इंसान पहली बार में इन बातों पर विश्वास भी नही करेगा| कोच साहब नें भी अपनी,  सहयोगी स्टाफ और खिलाड़ियों की फीस बढ़ाने को लेकर बोर्ड से मनमुटाव कर लिया| कुंबले को बोर्ड की ओर से 6 करोड़ 25 लाख का पैकेज मिलता है जिसे वे 7 करोड़ 50 लाख करने की माँग कर रहे थें| फिर पानी में रहकर मगर से बैर, वाली कहावत सच साबित हुई| अब जबकि एक साल पूरा होनेवाला है, कुंबले को बोर्ड अब न तो नया कॉन्ट्रैक्ट देने जा रही है और न हीं उनकी किसी माँग पर ध्यान देने|
लेकिन सवाल है कि कप्तान कोहली भी तो फीस बढ़ाने वाले मैटर पर कुंबले के साथ खड़े थें, तो फिर उनपर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया| आखिर इतनी जल्दी क्या बात हो गई कि 25 मई से पहले हर मैटर पर साथ खड़े होने के बावजूद, कोहली को कुंबले की कोचिंग में खामियां नजर आने लगी|
और इस बात की क्या गारंटी है कि कुंबले और कोहली चैंपियंस ट्रॉफी में टीम को एकजुट रखकर जीत दिला पायेंगे| टूटे हुए मनोबल के साथ कुंबले और उनकी टीम कोई चमत्कार कर जाएँ, ये बहुत बड़ी बात होगी| 4 जून को भारत को पाकिस्तान का सामना करना है और अभी भी टीम में सबकुछ सही नहीं है| बोर्ड के कमिटी मेंम्बर गांगुली, लक्ष्मण और सचिन अपने पूर्व साथी अनिल कुंबले और कप्तान विराट कोहली के बीच सुलह की कोशिशें कर रहे हैं लेकिन रिश्तों में एक बार बनी दीवार, शायद हीं कभी टूट पाए|
भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ी और कोच के बीच मनमुटाव कोई नई बात नहीं है| 2007 वर्ल्डकप के समय ग्रेग चैपल और कप्तान गाँगुली के बीच तनातनी की खबर बस दस साल हीं पुरानी है, इतिहास फिर से दोहराया जा रहा है| 2007 वर्ल्डकप में तो भारत का हाल सबको पता है, लेकिन दुआ की जा रही है कि ऐसा इस बार न हो| हाँ यह बात तो तय है कि अनिल कुंबले की तुलना, ग्रेग चैपल से कतई नही की जा सकती| कुंबले को बकैती करनी नहीं आती जिसमें चैपल एक्सपर्ट थे|
अनिल कुंबले की खासियत
कुंबले ऐसे इंसान हैं जो लाख मनमुटाव के बाद भी टीम के हित को आगे रखते हैं| कुंबले नें भले हीं पैसो की डिमांड करके अपने साख को थोड़ा गिराया है, लेकिन इसे समय और कुंबले दोनों की जरूरत भी कहा जा सकता है| कोहली अगर ये सोंच कर खुश हो रहे हैं कि अब कुंबले को भगाने के करीब हैं, तो ़यह बड़ी भूल भी साबित हो सकती है,  क्योंकि कुंबले की बराबरी का इंसान दीया लेकर ढ़ूँढ़नें से भी नहीं मिलेगा|
समय समय पर जब भी टीम शिखर पर होती है, ऐसी कोई न कोई बम फूटता है जो टीम को वापस फर्श पर पटक देता है| अनिल कुंबले नें हालांकि कोच पद के लिए फिर से आवेदन दिया है , जहाँ उन्हें वीरेन्द्र सहवाग, टॉम मूडी, रिचर्ड पायबस, लालचंद राजपूत और डोडा गणेश की चुनौती मिल रही है| उम्मीद है कि टीम सारे मतभेद भुलाकर 2013 वाला कारनामा दोहरा पायेगी|

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