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मूडी या शास्त्री: कौन बनेगा कोच, 'सीएसी' त्रिमूर्ति आज करेगी फैसला

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच पद के लिए फैसले की घड़ी जैसे जैसे नजदीक आ रही है, चर्चाओं और अटकलों का बाजार गर्म होता जा रहा है। आज दोपहर 1 बजे से सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण की क्रिकेट एडवायजरी कमेटी कोच पद के 6 चयनित उम्मीदवारों का इंटरव्यू करेगी।

पूरा क्रिकेट जगत यह देखनें को बेचैन है कि आखिर दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट बोर्ड, किसे टीम का 'कोच' चुनता है।यूँ तो दावेदारों की कमी नहीं है, लेकिन चुना तो किसी एक को हीं जाना है। कप्तान  विराट कोहली के साथ विवाद के कारण अनिल कुंबले नें चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में हार के बाद कोच पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।

वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे और टी20 सीरीज के लिए संजय बांगड़ को कार्यवाहक कोच की जिम्मेदारी दी गई थी।कोच पद के दावेदारों में पूर्व टीम डायरेक्टर रवि शास्त्री, पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग और ऑस्ट्रेलिया के भूतपूर्व क्रिकेटर टॉम मूडी का नाम प्रमुख है।वेस्टइंडीज के भूतपूर्व क्रिकेटर फील सिमंस, अफगानिस्तान के कोच लालचंद राजपूत, इंग्लैंड के रिचर्ड पायबास का नाम भी दावेदारों की लिस्ट में है।सिमंस का आयरलैंड को जमीनी स्तर से उठाकर टेस्ट दर्जा प्राप्त करने वाला देश बनाने में अहम योगदान है।

जिंबाब्वे के साथ अपने कोचिंग की शुरूआत करने वाले सिमंस को ग्राउंड लेवल से टैलेंट को खोजकर बेहतरीन टीम तैयार करने के लिए जाना जाता है।भारतीय टीम में चूँकि टैलेंट की कमी नहीं है, और घरेलू क्रिकेट से लगातार खिलाड़ी आ रहे है, शायद सिमंस की जरूरत वर्तमान भारतीय टीम को नहीं है। चोट के कारण काफी पहले क्रिकेट को अलविदा कहकर कोचिंग की दुनिया में कदम रखने वाले पायबास पाकिस्तान और बंग्लादेश के कोच रह चुके हैं।

घरेलू क्रिकेट के सबसे सफलतम कोच में से एक पायबास नें दक्षिण अफ्रीका के क्लब केप कोबराज और टाइटंस को छ: साल में नौ ट्रॉफी दिलवाई हैएशिया में कोचिंग का अनुभव उनके दावेदारी में इजाफा करेगा, लेकिन भारतीय क्रिकेटरों के साथ ज्यादा संपर्क न होना उनके खिलाफ जा सकता है। लालचंद राजपूत जब भारतीय टीम के मैनेजर थे, टीम नें 2007 का टी20 का वश्वकप जीता था। उसके बाद राजपूत नें कोचिंग में हाथ आजमाये, और वर्तमान में अफगानिस्तान के कोच हैं।

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उनकी कोचिंग में अफगानिस्तान नें न केवल कई बड़ी टीमों को हराया है, बल्कि टेस्ट नेशन का दर्जा प्राप्त करने में भी कामयाब हुआ। लेकिन रवि शास्त्री और वीरेन्द्र सहवाग के होते हुए कमेटी किसी अन्य देशी कोच पर दाँव खेलेगी, इसकी संभावना बेहद कम है।ऐसी स्थिति में पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद और डोड्डा गणेश की दावेदारी भी कमजोर पड़ती दिख रही है।अपने समय के विध्वंशक बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग का कोचिंग कैरियर अनुभवहीन है।

सन्यास के बाद सिर्फ किंग्स इलेवन पंजाब की कोचिंग करने वाले सहवाग अपने मुखर एवं हास्य व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते है।उन्होनें किंग्स इलेवन पंजाब की हार के बाद मैक्सवेल, मिलर जैसे विदेशी खिलाड़ियों पर जमकर निशाना साधा था।उनकी कोचिंग का मूल फंडा भी उनकी बैटिंग की तरह हीं है 'जाओ, बॉल देखो और हिट करो'..यही अनुभवहीनता उनके कोच बनने के रास्ते में रोड़ा बन सकता है।इन सबके बाद दो नाम ऐसे हैं जो किसी भी तरह एक दूसरे से कमजोर मालूम नहीं पड़ते।

तमाम विशेषज्ञों की मानें तो टॉम मूडी और रवि शास्त्री के बीच सीधी टक्कर होने की संभावना है|एक लेखक नें सही कहा है ' नेतृत्व सिर्फ पद या टाइटल नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध प्रभाव डालनें एवं प्रेरित करने से है|इंपैक्ट आपको विजय दिलाता है, टीम के बीच प्रेरणा आपके टीम में जीतने का जोश भरती है।'

अगर इन विशेषताओं की बात करें तो मूडी और शास्त्री दोनों इन शर्तों पर खड़े उतरते हैं। 1987 और 1999 के विश्वविजेता ऑस्ट्रेलियाई टीम के अहम सदस्य रहे 52 वर्षीय ऑलराउंडर टॉम मूडी के पास सभी दावेदारों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा कोचिंग का तजुर्बा है। श्रीलंका को 2007 विश्वकप के फाइनल में पहुँचाने वाले मूडी दो बार भारत का कोच बनते बनते रह गये।

2005 में ग्रेग चैपल नें कोच पद की रेस में मूडी को पछाड़कर बाजी मार ली, तो 2016 में अनिल कुंबले नें।2012 में आईपीएल की सनराइजर्स हैदराबाद टीम की कोचिंग संभालने वाले टॉम मूडी नें टीम को तीन बार प्लेऑफ तक पहुँचाया जिसमें टीम नें एक बार खिताब भी जीता। मूडी विपरीत परिस्थितियों में भी संयम बरतनें एवं अपने शांत स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। कमेटी के सदस्यों में से सचिन तेंदुलकर जहाँ रवि शास्त्री के नाम पर आगे बढ़ते दिख रहे हैं तो सौरव गांगुली की पसंद वीरेन्द्र सहवाग हैं।

अब गेंद निर्णायक रूप से वीवीएस लक्ष्मण के पाले में हैं जो टॉम मूडी के साथ हैदराबाद टीम के लिए साथ काम करते हैं। ऐसी स्थिति में मूडी को लक्ष्मण का साथ मिल सकता है। एक और बात जो इस 6 फीट 7 इंच के ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर के पक्ष में जा रही है, वह है टीम इंडिया के अधिकतर सदस्यों के साथ काम करने का अनुभव एवं उनसे नजदीकियाँ।

2014 से 2016 तक टीम डायरेक्टर का पद संभालने वाले रवि शास्त्री कप्तान कोहली के चहेते हैं। अपने समय के सुपरहिट ऑलराउंडर शास्त्री नें टीम को जीतनें की आदत डाली। डंकन फ्लेचर के कोचिंग में टीम के सुस्त होनें के बाद शास्त्री नें जिस तरह टीम को पुनर्जीवित कर नई उर्जा का संचार किया, वह काबिलेतारीफ है। जून 2016 में जब कुंबले को कोच चुना गया था तो रवि शास्त्री को काफी निराशा हुई थी। यहाँ तक की उन्होने ज्यूरी के फैसले की आलोचना भी की थी।

कुंबले विवाद से सबक लेकर बीसीसीआई नें स्पष्ट रूप से कमेटी को कह दिया है कि 'ऐसा कोच चुनें जिससे टीम और कप्तान को कोई दिक्कत न हो'। अब बहुत कम समय शेष है जब भारतीय सीनियर टीम को एक बेहतरीन कोच मिलेगा।

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