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जन्मदिन: सहवाग के नाम से डरते थे दुनिया के दिग्गज गेंदबाज

कहते हैं, सहवाग किताब के उस पन्नें को फाड़कर डस्टबिन में डाल देते हैं, जिसमें 'डिफेंस' शब्द लिखा हो. भले हीं टेस्ट क्रिकेट डिफेंस और आक्रमण का मिश्रण है लेकिन सहवाग नें इसकी परिभाषा बदल दी. टेस्ट क्रिकेट की पहली गेंद पर अक्सर सहवाग का बल्ला चल जाता था, और जब बल्ला चलनें लगता तो गेंदबाजों की शामत आनी तय थी. सर विवियन रिचर्ड्स नें एकबारगी कहा था कि 'सहवाग दुनिया के सबसे विध्वंशक बल्लेबाज हैं'. आज वीरेन्द्र सहवाग 40 साल के हो गए हैं.

जब राइट नें पकड़ा सहवाग का कॉलर:-

ऐसा नहीं है कि आक्रामक बैट्समैन के रूप में सहवाग को हमेशा शाबासी हीं मिली. 2002 में नेटवेस्ट ट्रॉफी के दौरान सहवाग लगातार गलत शॉट खेलकर आउट हो रहे थे. शांतचित कोच जॉन राइट जो अक्सर गुस्से में नहीं आते थें, उनसे बेहद खफा थे. उन्होने प्लान कर लिया कि सहवाग आज अगर अच्छा न खेला तो उसकी खबर लूँगा. सहवाग को पता चला लेकिन वो कहाँ मानते हैं. फिर गलत खेलकर आउट हुए. आते हीं राइट नें सहवाग का कॉलर पकड़ लिया. लेकिन सहवाग को अपनी गलती का अहसास था.

टेस्ट में मध्यक्रम का सहवाग कैसे बनें ओपनर

जब वीरेंद्र सहवाग का चयन टीम में हुआ था तब ये मध्यमक्रम में बल्लेबाजी करने के लिए आते थे ये बात शायद लोग ही जानते हैं । लेकिन उस समय के तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली ने उन पर विश्वास जताते हुए उन्हें ओपनिंग के लिए भेजा जहां सहवाग ने ऐसी धुआंधार बल्लेबाजी की कि टीम मैनेजमेंट और खुद कप्तान गांगुली भी देखते रह गए और यहीं से सहवाग के जीवन में एक बहुत बड़ा बदलाव आया और वो दुनिया के सबसे बड़े विध्वंसक बल्लेबाजों के लिस्ट में शुमार हो गए ।

इस वाक्ये को उन्होंने तब साझा किया था जब वो बोरिया मजूमदार की पुस्तक 'इलेवन गोड्स एंड मिलियन इंडियंस' के बंगाली वर्जन की लॉन्चिंग में पहुंचे थे । इस कार्यक्रम में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि "जब मैं साल 2002 में इंग्लैंड दौरे पर था तब उस समय कप्तान गांगुली और कोच जॉन राइट चाहते थे कि मैं टेस्ट मैच में पारी की शुरुआत करूं लेकिन मैं इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं था । तब गांगुली ने कहा कि तुमने कुछ समय वनडे में ओपनिंग की है इस लिए अब तुम्हारे पास अनुभव है ।

जिस पर सहवाग ने कहा कि सचिन और आपने अपने कैरियर की शुरुआत बतौर ओपनर किया है फिर भी आप ओपनिंग क्यों नहीं करते और मैं मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करूँगा जिस पर गांगुली नाराज हो गए और बोले कि अगर तुम टेस्ट मैच खेलना चाहते हो तो तुम्हें ओपनिंग करना होगा सवाल मत करो और अगर तुम ओपनिंग नहीं करना चाहते तो जाकर बैठ जाओ ।

सहवाग के पास कोई और ऑप्शन नहीं था लेकिन उन्होंने गांगुली से ये वादा लिया कि अगर वो 3-4 मैचों में नहीं चले तो उन्हें मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करने देंगे । इसके बाद गांगुली ने सहवाग की बात मान ली और अब सहवाग टेस्ट में भी ओपनिंग करने लगे ।

जब सहवाग नें गाना गुनगुनाकर सचिन को दिलाया गुस्सा:-

2011 विश्वकप में साउथ अफ्रीका के खिलाफ सचिन और सहवाग की चिर परिचित जोड़ी मैदान पर थी. सहवाग का जब पहले ओवर में ध्यान भंग हो रहा था, उन्होनें गाना गुनगुनाकर पहला ओवर खेल लिया. उसके बाद वे लय में लौट गए. ओवर समाप्ति पर सचिन नें बीच क्रीज पर आकर गलव्स टकराए और कुछ कहा. लेकिन सहवाग तो गाना गा रहे थे. ओवर दर ओवर यही चलता रहा. 4 से 5 ओवर बाद फिर सहवाग से सचिन नें कुछ कहा लेकिन सहवाग फिर गाना गुनगुना रहे थे.

एक ओवर बाद फिर से यही वाक्या हुआ. अबकी बार सहवाग नें कहा 'पाजी, मैं बहुत अच्छा खेल रहा हूँ, खेलनें दो'. इसपर सचिन नें कहा कि "अरे बात तो सुन लो कम से कम". सहवाग नें हामी भरी लेकिन फिर से उनकी बातों को सुननें के बजाय गाना गुनगुनाना पसंद किया. इसपर सचिन आगबबूला हो गए. सहवाग अपनें मशखरेपन की झलक कमेंट्री और ट्विटर पर ट्वीट करके दे हीं देते हैं.

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