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एक ऐसी आईपीएल टीम जो आजतक कभी सेमीफाइनल से पहले रूकी हीं नहीं!

जब बीसीसीआई नें 2008 में आईपीएल टीमों की घोषणा की. चेन्नई शहर के नाम से श्रीनिवासन की इंडिया सीमेंट्स नें 91 मिलियन डॉलर में टीम खरीदी, नाम रखा चेन्नई सुपरकिंग.  भारत को 2007 में टी20 विश्वकप दिलानें वाले महेन्द्र सिंह धोनी को कप्तान बनाया गया. टीम में स्टीफन फ्लेमिंग, मुथैया मुरलीधरन, मैथ्यू हेडन और माइक हसी जैसे खिलाड़ी लिए गए. पहले आईपीएल में टीम को फाइनल में राजस्थान से आखिरी गेंद पर हार मिली. 2009 में सेमीफाइनल तक का सफर तय किया.

2010 और 2011 में सीएसके नें धोनी के नेतृत्व में आईपीएल ट्रॉफी उठाई. 2012 और 2013 में  फिर फाइनल में पहुँची लेकिन क्रमशः कोलकता नाइटराइडर्स और मुंबई इंडियंस से हारकर उपविजेता ट्रॉफी से संतोष करना पड़ा. 2014 में सेमीफाइनल में और 2015 में फाइनल तक पहुँची जहाँ फिर से मुंबई नें चेन्नई को हरा दिया. इन आठ सीजन मे यह एकमात्र टीम थी जिसनें सिर्फ एक कप्तान से हीं 8 सीजन खेला.

टीम के जीत का प्रतिशत सबसे ज्यादा 60% है. कोई भी टीम चेन्नई को पहले आठ सीजन में एक भी बार नॉकआउट में पहुँचनें से नहीं रोक पाई. लेकिन साल 2015 में सट्टेबाजी के आरोपों के बाद चेन्नई सुपरकिंग को राजस्थान रॉयल्स के साथ सस्पेंड कर दिया गया. एकबार फिर इस साल जब आईपीएल में वापसी हुई है, टीम के सबसे ज्यादा रन बनानें वाले सुरेश रैना, कप्तान धोनी, जडेजा, ब्रावो, मुरली विजय जैसे नाम दुबारा टीम में लौट गए हैं लेकिन टीम की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेनें वाले आर अश्विन इस बार इस टीम के सदस्य नहीं हैं, चेन्नई को स्पिन मे उनकी कमी जरूर खलेगी.

2018 में चेन्नई सुपरकिंग

चेन्नई के अधिकतर खिलाड़ियों की उम्र 30 साल से ज्यादा है लेकिन हर विभाग में उसके पास काफी ऑप्शन मौजद है.ओपनिंग की बात करें तो शेन वाटसन के साथ मुरली विजय नजर आ सकते हैं. ऐसे डु प्लेसिस और सैम बिलिंग्स भी ओपन कर सकते हैं. हालांकि रैना तीसरे नंबर पर हीं आयेंगे. चौथे नंबर पर केदार जाधव और अंबाती रायुडू के रूप में दो ऑप्शन है लेकिन जाधव के पास ऑलराउंड एबिलिटी है जो उन्हें रायुडू से पावरफुल बनाती है.

महेंद्र सिंह धौनी, ड्वेन ब्रावो और रविंद्र जडेजा का रहना तय है. स्पिन में अगर ऑफ स्पिनर को चुना जाता है तो हरभजन सिंह होंगे लेकिन यह देखते हुए कि टी20 में लेग स्पिनर बेहतर करते हैं, कर्ण शर्मा एकादश में शामिल किए जायेंगे.इमरान ताहिर के रूप में एक विश्वस्तरीय लेग स्पिनर है लेकिन एक टीम में अधितकम चार विदेशी हीं हो सकते हैं. ताहिर का चांस कम हो जाता है. शार्दुल ठाकुर के रूप में एकमात्र बड़ा इंडियन पेसर है,जिनका खेलना तय है. मार्क वुड और जूनियर डाला ऐसे नाम हैं जो लगातार खेलते दिख सकते हैं. क्रिकेट के आखिरी पड़ाव पर पहुँच चुके धोनी क्या लगातार आठ सीजन में नॉकआउट पहुँचनें का कारनामा इस बार भी दोहरा पायेंगे. यह बड़ा सवाल सबके जेहन में होगा.

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