राजकोट में भारत का 'राज', टेस्ट क्रिकेट का मखौल उड़ा रहा वेस्टइंडीज!
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राजकोट में भारत का 'राज', टेस्ट क्रिकेट का मखौल उड़ा रहा वेस्टइंडीज!

किसी क्रिकेट मैच में दर्शकों को कैसे एंटरटेन किया जाता है, यह वेस्टइंडीज से अच्छा कोई नहीं सिखा सकता. हर टेस्ट मैच को वेस्टइंडीज की टीम वनडे और खासकर टी20 के लिए प्रैक्टिस मैच के रूप में लेती है. प्रैक्टिस मैच माने जो मन में आए, वो करे. जिस मैच के रिजल्ट से कोई मतलब ना हो. राजकोट में वेस्टइंडीज, भारत से पहला टेस्ट, तीसरे हीं दिन चायकाल के बाद पारी और 272 रनों से हार गया है. भारत नें दूसरे दिन चायकाल तक खेलते हुए 9 विकेट पर 649 रन बनाए जिसमें तीन शतक थे. इसके बाद कुल तीन सेशन से थोड़ा ज्यादा वक्त में मेहमान दो बार ऑलआउट हुए. रिजल्ट तो तय था लेकिन इतना आसान होगा, यह थोड़ा सरप्राइज था.

दोनों टीमों के लिए इस टेस्ट के मायनें:-

1. टीम इंडिया को मिला एक और युवा विस्फोटक बल्लेबाज :-

इंग्लैंड में पहले रिषभ पंत, फिर हनुमा विहारी और अब राजकोट में पृथ्वी शॉ नें धमाकेदार अंदाज में टेस्ट क्रिकेट का स्वागत किया है. शॉ नें अपनी बैटिंग से सहवाग की याद दिला दी वहीं रिषभ नें भी गेंदो को ऐसे सीमापार पहुँचाया मानों उनके एक ऊंगली का काम हो. पंत को कीपिंग में सुधार करना है जबकि शॉ का रियल टेस्ट विदेशी पिचों पर हीं होगा. अगले टेस्ट में मयंक अग्रवाल को जगह मिलती है तो एक और अच्छा बैट्समैन टीम को मिल जायेगा.

2. भारतीय गेंदबाजों नें एक बार फिर साबित किया-

साउथ अफ्रीका हो, इंग्लैंड हो या भारत, बस थोड़ा टीम कॉम्बिनेशन चेंज हो जाता है लेकिन बॉलिंग की धार हमेशा तेज हीं रहती है. शमी नें नई गेंद से विकेट दिलाई, उमेश नें प्लान के साथ पार्टनरशिप ब्रेकर का काम किया. ध्यान रखिए, बुमराह, भुवी और ईशांत तो अभी विश्राम में है. यानि 5 कंप्लीट पेसर. स्पिन में अश्विन, जडेजा को एक और साथी मिला कुलदीप के रूप में. भारतीय उपमहाद्वीप के कंडीशन में "इस तिकड़ी से जीत जावे, वही विजेता कहलावे"

3. राहुल, रहाणे के बल्लेबाजी में अनियमितता एक चुनौती-

पारी के शुरू में अंदर आती गेंद यानि इनस्विंगर को खेलने में केएल राहुल पानी माँगते हैं, वहीं रहाणे अच्छी शुरूआत के बाद विकेट फेंक कर चले जाते हैं. अब जबकि कंप्टिशन बढ़ गया है,नए नए खिलाड़ी आ रहे हैं. यहाँ तक कि हनुमा विहारी और मयंक अग्रवाल को बेंच पर बैठना पड़ा, विजय, धवन और रोहित टेस्ट में खराब प्रदर्शन के कारण बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. एक एक गलती बहुत महँगी पर सकती है

4. वेस्टइंडीज के पास 'नो स्ट्रेटेजी'. 'होपलेस' 'हेल्पलेस' टीम

पहले टेस्ट से पहले हीं पता लग गया था कि मेहमान टीम में ना तो होल्डर होंगे और ना हीं केमार रोच. कप्तान बनें क्रेग ब्रेथवेट. बउआ जैसी शक्ल वाले ब्रेथवेट, कप्तानी में भी बउआ साबित हुए. पहले ओवर में राहुल का विकेट लेनें वाले टीम के सबसे अनुभवी पेसर गैब्रियल को 4 ओवर बाद हीं हटा दिया. जब रन रोकना था तो विकेट के लिए गए, और जब विकेट के लिए दबाव बनाना था, तो रन रोकनें चले गए. बिना रणनीति के ग्राउंड पर उतरना और वेस्टइंडीज पैदल चलकर जाना बराबर का मामला है. टीम के पास साई होप तो हैं लेकिन जीतनें का होप बिल्कुल नहीं.

5. मेहमानों का गैर-जिम्मेदाराना खेल,एक तरफ कुँआ दूसरी तरफ खाई

पहली पारी में भारत नें 649 रन बना डाले. हाँ, अगर यहाँ कोई भी टीम होती तो इस पहाड़ के नीचे दब जाती. लेकिन वेस्टइंडीज़ के बैट्समैन नें विकेट पर टिकनें की कोशिश हीं नहीं की. पहली गेंद से आक्रमण पर उतारू वेस्टइंडीजियन बल्लेबाजों भूल गए कि अच्छी गेंद के सम्मान भी देना होता है, और वो भी तब जब दुनिया की टॉप बॉलिंग यूनिट आपके सामनें हो. पहली पारी में 48 ओवर में 181 रन और फिर सेकंड इनिंग में 50 ओवर में 196 पर ऑलआउट. गलती एक बार हुई तो दूसरी बार नहीं दोहराई जानी चाहिए थी. तभी तो महान वेस्टइंडीज पेसर कर्टनी वॉल्श नें दूसरी पारी में खराब शॉट सेलेक्शन को अक्षम्य करार दिया है.

राइटर्स कॉर्नर- जिस तरह से वेस्टइंडीज खेली, इस लीड को आगे बढ़ाकर दो दिन के अंदर दूसरा टेस्ट भी खत्म हो सकता था. हाँ, अगली गेंद पर बाउंड्री लगेगी या विकेट गिरेगा, बस यही देखना रोचक था. मेहमान बल्लेबाजों को क्रीज पर रूकना चाहिए था लेकिन वो तो मजे लेनें आए थे. मेहमान वेस्टइंडीज ये ना भूले कि हैदराबाद में भी मेजबान उन्हें नहीं छोड़ेंगे. कुल मिलाकर टेस्ट सिरीज बोरिंग हीं रहेगी. हाँ, वनडे और टी20 का इंतजार रहेगा.

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