इतिहास के पन्नों से खेल

इस एक थप्पड़ ने बदल दी थी सचिन तेंदुलकर की जिंदगी

मास्टर ब्लास्टर और क्रिकेट के भगवान के नाम से मशहूर सचिन तेंदुलकर का क्रिकेट के प्रति दीवानगी और पागलपन इतना था कि उन्होंने महज 16 साल की उम्र में ही अंतरास्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया. बचपन में मात्र एक ही जर्सी थी सचिन के पास . जिसे वो पहनकर हर रोज क्रिकेट खेला करते थे और इसीलिए खेलने के बाद हर शाम उस जर्सी को सचिन साफ करते ताकि पसीने की गंध की वजह से उन्हें औरों के सामने शर्मिंदगी महसूस ना करना पड़े.

क्रिकेट के प्रति इतना शौक और जुनून ही सचिन को दुनिया के महानतम बल्लेबाजों की श्रेणी में शिर्ष पर खड़ा कर दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सचिन को कभी इसी क्रिकेट की वजह से थप्पड़ खानी पड़ी थी! तो आइए बताते हैं आपको सचिन के जीवन की ये इंसिडेंट.

बचपन के दिनों की है बात

दरअसल बचपन में स्कूल के बाद सचिन तेंदुलकर का सारा दिन क्रिकेट में ही बीतता था. सचिन के उस समय के कोच रमाकांत आचरेकर थे जो सचिन पर काफी मेहनत करते थे और स्कूल खत्म होने के बाद हर रोज सचिन को 4 मैच खिलवाते थे।

जब अपनी स्कूल की टीम को चियर्स करने पहुंचे सचिन

स्कूल खत्म होने के बाद एक दिन सचिन अपना क्रिकेट का अभ्यास ना कर अपनी स्कूल की टीम को चियर्स करने वानखेड़े स्टेडियम पहुंच गए। वहां उन्होंने देखा कि उनके गुरु रमाकांत आचरेकर पहले से ही स्टेडियम पहुँचकर मैच देख रहे थे. अपने गुरु को वहाँ देख सचिन उनसे मिलने पहुंच गए। जब रमाकांत आचरेकर ने सचिन को वहां देखा तो पूछा कि उनका अपना अभ्यास मैच का क्या हुआ. कैसा रहा आज ?

सचिन का जवाब मिला कि वो आज क्रिकेट का अभ्यास ना कर अपने स्कूल की टीम को चियर्स करने पहुंचे हैं. यह सुन कोच ने सचिन को एक थप्पड़ रसीद कर दी।

आचरेकर ने गुस्से में सचिन से कहा कि 'तुम्हें दूसरों को चीयर करने यहां नहीं आना चाहिए था, बल्कि तुम्हें ऐसा खेलना चाहिए कि लोग तुम्हे चीयर करने मैदान में पहुंचे'. कोच के इस डांट और थप्पड़ के बाद सचिन की जिंदगी मानो बदल सी गयी। और उन्होंने क्रिकेट को गंभीरता से खेलना शुरू किया।

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