खेल

उड़नपरी ऊषा मीडिया से क्यों हैं नाराज ? ट्वीट कर कहा 'राष्ट्र पहले'

ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 2018 राष्ट्रमंडल खेल यानि कॉमनवेल्थ गेम्स चल रहा है. 12 स्वर्ण के साथ इंडिया तीसरे नंबर पर चल रहा है. भारत के भोरोतोलकों नें स्वर्ण के साथ पदकों का जो खाता खोला, वह टेबल टेनिस, बैडमिंटन, निशानेबाजी के रास्ते अब कुश्ती, मुक्केबाजी, हॉकी तक पहुँचनें वाला है.इन खेलों में पदक पक्के हो चुके हैं बस इंतजार है स्वर्ण का. लेकिन इन सबके बीच भारतीय मीडिया नें एक बार फिर ऐसा कुछ किया है जिसे कोई भी भारतीय पसंद नहीं करेगा ।

क्या है मामला:

दरअसल वैश्विक स्तर पर जब हम खेलों में भाग लेते हैं तो हरेक खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा होता है.वहाँ सिर्फ और सिर्फ तिरंगा लहराता है लेकिन वही एथलीट जब पदक जीतता/जीतती है तो यहाँ की मीडिया कहती है.. हरियाणा की बेटी नें लहराया परचम, बिहार की बेटी नें किया नाम रोशन, यूपी के लाल का कमाल..

किसनें क्या कहा: भारतीय ट्रैक एंड फील्ड(दौड़) की क्वीन 'उड़नपरी' पीटी उषा नें ट्विटर पर मीडिया को जमकर लताड़ लगाई है. ऊषा नें जो ट्वीट किया उससे उनका दर्द और गुस्सा दोनों झलकता है. उन्होनें ट्वीट किया 'रिपोर्टर: हरियाणा का लड़का जीता, दिल्ली गर्ल नें किया कमाल.. चेन्नई गर्ल- पंजाबी ब्वॉय!! हम राज्यों के बिना भी तो कर सकते हैं? क्या आपनें कभी अमेरिकी रिपोर्टर से सुना है कि फ्लोरिडा ब्वॉय जीता या टेक्सास गर्ल.. या ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न गर्ल जीती ।

साथ हीं उन्होनें हैशटैग #NoBoundries #OneNation नाम के दो हैशटैग भी लगाए. उनकी बातों में भरपूर दम है. क्या हम राज्य के बिना बात नहीं कर सकतें? कभी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया में तो ऐसा नहीं होता फिर भारत में क्यों?

पीटी उषा के इस ट्वीट के बाद भारत के खेलमंत्री और 2004 ओलंपिक के सिल्वर मेडलिस्ट शूटर राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ नें तपाक से एक कैप्शन के साथ उनके ट्वीट को रिट्वीट किया. उन्होनें लिखा 'प्रत्येक बार जब इंडिया या हम इंडियन जीतते हैं, तो हमारा तिरंगा गर्व से लहराता है. भले हीं खेल मंत्रालय, साई, राज्य और कॉरपोरेट उन्हें सुविधा देता है लेकिन हम अपनें देश, एक झंडे और एक राष्ट्र के लिए खेलते हैं. एक भारत श्रेष्ठ भारत!

लेखक कॉर्नर

भारतीय मीडिया का एक ऐसा वर्ग है जो किसी भी खबर को सनसनीखेज बनाकर पड़ोसता है. वे उस राज्य तक अपना पहुँच बनानें के लिए ऐसा करते हैं. ताकि वहाँ के खिलाड़ी का नाम सुन उस वेबसाइट या चैनल को लोग देखें और पढ़ें, जो गलत है. यह कोई राष्ट्रीय खेल थोड़े हीं है जिसमें राज्य का नाम लेकर उसका गुणगान किया जाए. सबसे जरूरी है कि उसनें अपनें देश के लिए मेडल लाया है ।

राष्ट्रमंडल खेलों में वे भारतीय हैं न की बिहार, यूपी, हरियाणा, मराठी या साउथ इंडियन.जब पोडियम(जहाँ मेडल मिलता है) पर भारतीय खिलाड़ी होते हैं और भारत का तिरंगा शान से लहरा रहा होता है तो वह उत्तर भारतीय हो या साउथ इंडियन सब गर्व से फूल उठते हैं. हमें ]अपनें राष्ट्र पर गर्व है.

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