इतिहास के पन्नों से खेल

अफ्रीकन पेस बैट्री को 'डाउन' कर सहवाग नें डेब्यू में जड़ा था शतक

2001 के आखिरी महीनों में टीम इंडिया दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर थी। पहला टेस्ट 3 नवंबर से ब्लूमफोंटेन में शुरू हो रहा था। मेजबान कप्तान शान पोलाक नें उछाल भरी तेज पिच पर टास जीतकर पहले फील्डिंग करनें का फैसला किया। भारतीयों के लिए परिस्थितियाँ बिल्कुल अलग थी. पिच पर घास नजर आ रही थी,यानि हेवार्ड,नतिनी,पोलाक और कैलिस की चौकड़ी के लिए थाल सजकर तैयार थी।

शिवसुंदर दास(9),राहुल द्रविड़(2),वीवीएस लक्ष्मण(32) और सौरव गांगुली(14) अफ्रीकन पेस बैट्री के सामनें घुटनें टेक दिए। स्कोर 68-4, हेवार्ड की गेंदे आग उगल रही थी। सचिन तेंडुलकर एक छोर पर खड़े थे लेकिन दूसरे छोड़ पर कोई टिक नहीं पा रहा था। तभी क्रीज पर आगमन हुआ अपना पहला टेस्ट खेल रहे वीरेंद्र सहवाग का,जो बाद में वीरेंद्र 'विस्फोटक' सहवाग बना।

जैक कालिस की गेंद. ओवरपिच्ड, अपनी जगह पर खड़े खड़े शानदार कवर ड्राइव..सहवाग के टेस्ट करियर का पहला चौका। दो विकेट ले चुके हेवार्ड सहवाग को गेंद कर रहे थे.. आगे की गेंद और फिर खड़े खड़े वीरेंद्र सहवाग का हाफ कवरड्राइव-हाफ बैकफुट पंच, गेंद कवर बाउंड्री के पार.. फिर स्लिप के ऊपर से स्लैश पर चौका। नतिनी को पहले कवर पर बैकफुट पंच और फिर शानदार स्ट्रेट ड्राइव. हेवार्ड की गेंद पर शानदार आफ ड्राइव खेलते हुए अपने डेब्यू में हीं अर्द्धशतक जड़ दिया। वीरेंद्र सहवाग इतनें पर रूकनें को तैयार नहीं थे।

                            अपने डेब्यू मैच में शतक बनाने के बाद सहवाग

कप्तान पोलाक की गेंद को पहले स्क्वायर कट और फिर स्ट्रेट ड्राइव मारकर अपनें इरादे जाहिर कर दिए। कोई भी अफ्रीकी गेंदबाज सहवाग को रोकनें में नाकाम साबित हो रहा था। पोलाक की गेंद, शार्टआफ लेंथ. सहवाग का जबर्दस्त बैकफुट पंच और इसी के साथ सहवाग नें अपनें डेब्यू मैच में हीं शतक का कारनामा कर दिखाया।

बैकफुट पंच और स्ट्रेट ड्राइव से सजी यह 173 गेंद पर 105 रनों की पारी क्रिकेट के बेहतरीन शतकों मे से एक मानी जाती है। जब सहवाग को टेस्ट टीम में शामिल किया गया तो बहुतों को शक था कि वनडे क्रिकेट का यह तेजतर्रार बैट्समैन टेस्ट कैसे खेल पायेगा। लेकिन इसी बैट्समैन नें आगे चलकर साढ़े आठ हजार रन बनाए जिसमें दो तिहरे शतक हैं। इस टेस्ट से पहले सहवाग न्यूजीलैंड के खिलाफ 69 गेंदों में शतक बना चुके थे।

कई वर्षों बाद आस्ट्रेलिया के भूतपूर्व कप्तान इयान चैपल नें उन्हें दुनिया का विध्वंसक बल्लेबाज घोषित किया। स्पिनर के तौर पर टीम में जगह पानें वाले सहवाग कुछ हीं समय में टीम के ओपनर बन गए थे। उसके बाद लगभग एक दशक तक उनके गुरू सचिन तेंडुलकर नें दूसरे छोर पर खड़े होकर उन्हें खेलते देख इंन्ज्वाय किया। खुद सिंगल लेकर सहवाग को स्ट्राइक देते और सहवाग गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते रहे।

वीरेंद्र सहवाग को निखारनें का सारा श्रेय कप्तान सौरव गांगुली को जाता है,जिन्होनें उनके काबिलियत को परखा। टीम इंडिया के 'वीरू' नें आज हीं के दिन टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा था,जिसकी यादें आज भी क्रिकेट प्रेमियों में ताजा है।

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