कहानी

मैं मेरी बीबी और वो

मेरा विश्वास करो सुषमा अभी वहां जाना ठीक नहीं होगा रात काफी हो चुकी है चलो घर चलते हैं । और इसी बीच अचानक से लाइट चली गई वहां सड़क पर खड़ा ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा सड़क अंधेरे की आगोश में सो गई हो । मैंने एक बार फिर सुषमा की ओर देखा कहा चलो घर चलते हैं. कल चली जाना मैं बात कर ही रहा था कि एक मोटरसाइकिल सवार सुषमा के पास से गुजरता है और उसके हाथों में कुछ थमा कर बिजली की तरह गायब हो गया ।

अंधेरा होने के कारण मैं कुछ देख नहीं पाया कि उस मोटरसाइकिल सवार नें मेरी बीबी के हाथ में क्या थमा गया बस ऐसा मुझे प्रतीत हुआ की कुछ कागज का था । जब मैंने पूछा तो वो थोड़ी धकमकाते हुए बोली कुछ नहीं है जी , आप तो बस फिजूल में सोंचते रहते हैं । चलिए घर चलते हैं .

मेरे मन में ये सवाल उठ रहा था अचानक सुषमा घर चलने को तैयार कैसे हो गई और वो आदमी कौन था क्या सुषमा का उसके साथ कुछ.... अरे नहीं मैं भी क्या सोंच रहा हूँ लेकिन मैं इस बात से  दंग था कि कुछ देर पहले तक वो कहीं जाना चाहती थी और अब घर चलने को तैयार कैसे हो गई रात के 9 बज चुका था । खैर ज़्यादा दिमाग न लगते हुए मैंने गाड़ी स्टार्ट की और घर की ओर चल दिया ।

मैं हमेशा ऑफिस से निकलते हुए रास्ते मे अपनी पत्नी को भी साथ ले लेता था उसका ऑफिस भी रास्ते में ही पड़ता था । हमारी शादी लव मैरेज हुई थी शादी के 2 साल बीत चुका थे पर हमारा कोई और बच्चा नहीं था वो इसलिए कि सुषमा अभी इन झंझटों में नही पड़ना चाहती थी और ये अकेले की चीज़ें तो है नहीं । आज कुछ ज्यादा ही लेट हो गए हम है न सुषमा ? तभी कांता बाई डायनिंग हॉल से आवाज लगाती है साहब खाना तैयार है ।

कांता बाई हमारे फैमिली मेंबर की तरह ही है वो दिन भर घर में ही रहती है और घर की देखभाल करती हैं । चलो सुषमा डिनर कर लेते हैं कल थोड़ा जल्दी उठना है ऑफिस में कल मीटिंग है हाँ चलिए । डिनर करते हुए मैं वही सोंच रहा था कि वो व्यक्ति कौन था लेकिन वो चिढ़ न जाये इस लिए पूछना ठीक नही समझा । फिर हम  दोनों अपने कमरे में आ जाते हैं  । मैंने सुषमा की ओर मुख करके पूछा कोई परेशानी है क्या आजकल इतनी उखड़ी उखड़ी सी रहती हो उसने कोई जवाब नहीं दिया शायद वो सोने का कोशिश कर रही थी या फिर नाटक पता नहीं ।

सोंचते सोंचते कब मेरी आँख लग गई पता नहीं चला । सुबह में जब मेरी नींद खुली तो देखा कि गैलरी में सुषमा किसी से बात कर रही थी शयद वो किसी से मिलने की बात कर रही थी लेकिन  उसकी नज़र जैसे ही मुझ पर पड़ी उसके चेहरे का रंगत उतर गया और शायद कॉल भी कट चुका था । आखिर सुषमा किस से मिलने की बात कर रही थी और मुझे देखते हीं उसके चहरे की  रंगत क्यों गायब हो गई क्या सुषमा का वाकई में किसी के साथ ....अरे नहीं. फिर मैंने पूछा क्या हुआ उसने मेरे सवालों को नजरअंदाज करते हुए बोली आप जल्दी से तैयार हो जाइये मैं भी तैयार हो जाती हूँ . ऑफिस के लिए देर हो रही हैं ।

दोपहर में सुषमा का कॉल आता है कि आज मेरे ऑफिस में काम खत्म हो गया है तो मैं घर जा रही हूं मुझे पिक करने मत आना । पता नहीं ये वाक्या पिछले काफी दिनों से चल रहा था  और जब भी ऐसा होता कांता बाई को सुषमा छुट्टी पर भेज देती । मैंने कहा चलो ठीक है घर पर मिलते हैं । शाम को जब मैं घर पहुंचा तो बगल वाले दुबे जी कहते हैं आप के यहाँ आजकल कुछ ज्यादा ही गेस्ट आने लगे हैं कोई लॉटरी वॉटरी लगी है क्या । मैंने कहा क्या मज़ाक कर रहे हैं दुबे जी और ये कहते हुए मैंने घर का बेल स्विच को दबाया, सुषमा ने दरवाजा खोला  और फिर मैं घर के अंदर आ गया और दुबे जी भी अपने घर चले गये ।

जब मैंने सुषमा की और देखा तो सुषमा के चेहरे पर एक अजीब सी थकान थी मानो वो कुछ काम कर रही थी या कुछ और । मैंने पूछा कांता बाई आज भी नहीं आई क्या सुषमा बोली उसके लड़के की तबियत खराब है इस लिए मैंने छुट्टी दे दी । सुबह जब कांता बाई वापस आई तो मैंने पूछा अब तुम्हारा लड़का राजू कैसा है उसने सुषमा की ओर देखते हुए कहा हा हा साहब ठीक है। ऐसे ही कई महीने बीत गए और सुषमा अक्सर घर जल्दी आ जाती ।

आज मेरे मन में पता नही सुबह से ही कुछ उथल पुथल मचा हुआ था मैं कुछ सोंच ही रह था कि तभी सुषमा का कॉल आता है मैं घर जा रही हूं मुझे पिक करने मत आना । आज मेरे मन मे कई सवाल थे जो शायद आज सदा के लिए समाप्त हो जाते ये सोंचते हुए मैं आज ऑफिस से जल्दी ही निकल गया और घर पहुंचने के बाद मैंने देखा की सुषमा गाड़ी लेकर कहीं जा रही है . उस वक़्त मैंने कुछ नहीं सोचा और चुप चाप उसका पीछा करने लगा . तभी उसकी गाड़ी एक घर के पास जा कर रूकती है .

मैंने भी गाड़ी रोका और छुप कर देखने लगा वो घर के अन्दर गई . उस कमरे से लग कर एक खिड़की थी उस खिड़की की ओट में छुप कर देखने लगा . वहां एक वृद्ध महिला और एक अपाहिज लड़का था . सुषमा बोल परती है कैसी हो मासी और मोहन तुम कैसे हो . ठीक हूँ दीदी आप कैसी हैं मैं भी ठीक हूँ. फिर सुषमा थैले से कुछ निकलते हुए बोलती है यों कुछ मिठाई है और ये कुछ पैसे रख लो मोहन का इलाज ठीक से करवाना.

तभी वो वृद्ध महिला बोलती है जितना तुम इस गैर के लिए करती हो उतना तो कोई सगा भी ना करे बेटी . सुषमा ठीक है मासी अब हम चलते हैं उनका आने का समय हो चूका है . इससे पहले सुषमा निकलती मैं झट से गाड़ी स्टार्ट कर वहां से निकल गया . आज मेरे अन्दर के वो सरे सवालात खत्म हो चूका थे बस दिख रहा था वो सुषमा का भोलापन .

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