कहानी

कहानी: पुत्र रत्न (part - 2)

इस कहानी का पहला भाग पढने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: पुत्र रत्न (part 1)

इस कहानी में अब तक आप ने पढ़ा की कैसे यज्ञ में दी गई आहुति से काम देव प्रकट हुए और वरदान के बदले श्राप दे डाला और भृंग राज फूट फूट कर रोने लगा और अब आगे

बेचारा भृंगराज न घर का न घाट का अब जिसे इतने वर्षों से पुत्र रत्न की प्राप्ति चाहिए था उसे यज्ञ करने के बाद भी पुत्र मिला भी तो कैसा मिक्सअप ।

भृंगराज…!!! अचानक चिल्लाने की आवाज सुनाई दी वो कोई नही साक्षात कामदेव थे जो मांस की आहूति डालने से बहुत ज्यादा कुपित थे और बोल रहे थे तुम्हारी गलती कोई छोटी मोटी नही है जो रोने बिलखने से माफ होगा और मैं ने तुझे श्रापित पुत्र का श्राप भी दे दिया है और उसे वापस नही लिया जा सकता इतना कहते ही वो अंतर्ध्यान हो गए ।

ऋषि बोले पुत्र भृंगराज..! जी ऋषि वर कहिये..! सबसे पहले तो ये पता लगाना होगा कि ये आहुति में मांस किसने मिलाया ? जी ऋषिवर आज्ञा दें मैं अभी से जांच पड़ताल सुरु कर दु हाँ पुत्र अवश्य और मुझे जाने की अनुमति दो ।

यज्ञ के लगभग नौ महीने बीत चुके थे और न ही आहुति में मांस डालने वाले का पता चला था और न ही उस बच्चे की जिसका जन्म होने वाला था भृंगराज की पत्नी रोज दर्द से इस कदर कराहती थी कि जैसे लगता था अब वो बच्चा बाहर निकलेगा लेकिन न क्या मजाल की वो बाहर निकले इसी तरह 15 महीने बीत गया लेकिन अभी तक वो बच्चा बाहर नही निकला था कितने डॉक्टर वैद्य दिखवा लिया कोई फायदा नही !

किसी को कोई करण ही नही मिल रहा था एक डॉक्टर ने तो यहां तक कह दिया बच्चा पेट मे है ही नही ये कोई नया बीमारी लगता है और उस डॉक्टर के ये कहने के एक दिन बाद ही भृंगराज की पत्नी के पेट मे ऐसा दर्द हुआ कि वो उछल कूद मचाने लगी पड़ोसियों के महिलाएं शांत करने में जुट गई थी तभी एक बच्चे की कुहकने की आवाज सुनाई दी बहुत ही अजीब सी आवाज थी ।

बेचारा भृंगराज रो रहा था हाय राम क्या सपना संजोया था क्या हो गया और तभी अचानक भृंगराज बिजली की तरह जोर से उठा और जिधर बच्चा हुआ था उस रूम की तरफ लपका और एक झटके में ही बच्चा उसके हाथ मे था किसी को कुछ समझ मे आता उस से पहले ही वो जंगल की ओर दौड़ लगा दी तभी ऋषि प्रकट हुए और जोर से बोले भृंगराज!!!!!!!भृंगराज वो बेचारा कांप सा गया ये क्या करने जा रहे हों तुम तुझे ज्ञात भी है इसे तुम जंगल में छोड़ोगे और इसका रूप और भयावह ले लेगा फिर ये मानव नही दानव बन जायेगा और पूरी सृष्टि में भुचाल ला देगा भलाई इसी में है कि तुम इसे अपने यहां ही पालो ठीक है गुरुवर जो आज्ञा लेकीन वो जैसे ही मुड़ा तभी एक शेर झपट्टा मार कर बच्चे को दबोच लिय़ा और बच्चे को एक तरफ फेंक कर भृंगराज पर वार करने लगा ।

वो तो बेचारा वैसे भी शरीर से मारा बूढ़ा हो चला था क्या शेर से लड़ेगा ? लेकिन गलत सब गलत सोच पर पानी फेर दिया भृंगराज

भृंगराज एक दम से कुदा और शेर के आँख में अपनी उंगली घासोट दी शेर तिलमिलाया और एक पंजा उसके पीठ पर दे मारा और जितना हो सके अपने पंजो में मांस बकुटा और फिर वार करने के लिए तैयार खड़ा था कि तभी भृंगराज संभला और बच्चे की ओर झपट्टा मार कर ऋषि की ओर दौड़ लगा दी तभी...  क्रमसः

Facebook Comments
Pushpam Savarn
pushpam is a content creator and a journalist
http://www.thenationfirst.com

Leave a Reply