जब रो पड़ी थी मां | mother's day
कहानी

जब रो पड़ी थीं मां

मां एक ऐसा शब्द है जिसके उच्चारण मात्र से ही मन को अपार शांति प्राप्त होती है जिस तरह से समंदर अपने आगोश में सारे नदीयों को भर लेता है चाहे उनमे कितनी ही गंदगी क्यों ना हो उसी तरह से मां का हृदय भी होता है । अपनी सुख सुविधा को त्याग कर अपने पुत्र की सुख सुविधा को प्रथमिकता देतीं हैं । आज मैं अपने मां के साथ तो नही हूँ परंतु उनकी यादें और उनकी ममता मेरे साथ है ।

मैं अपने घर मे सबसे करीब अपने मां के ही रहा हुँ क्योंकि उनकी आंचल के बगैर मुझे नींद ही नही आती और यही कारण है कि मैं उन से हर रोज बात करता हुं क्योंकि जब तक मैं उन से बात ना कर लुं मुझे नींद ही नही आती । वैसे तो उनका  प्राण परिवार के हर एक व्यक्ति मे बसता है लेकिन शायद उनके पुत्रों में छोटा होने के कारण उनका झुकाव मेरी ओर या मेरी झुकाव उनकी ओर थोड़ा ज्यादा है और कहा भी जाता है छोटे पुत्र का झुकाव मां की ओर ज्यादा होता है ।

मैं बचपन से हीं मां साथ रहा हूँ । 12th पास करने के बाद मेरा नामांकन पटना के एक कॉलेज मे हुआ और अब मेरा उन से दूर होना तय हो चुका था दो दिन शेष था । मां अपने कमरे में थीं और अचानक मेरा उस कमरे मे आना होता है । मेरी नजर उन पर पड़ती है उनकी आंखें आंसुओं से लबा लब भरा हुआ था मैंने पुछा आप रो क्यों रही है उनका जवाब सुनने के बाद मैं सन्न हो गया उनका जवाब था कि अब तुम भी मुझे छोड़ कर मुझसे दूर चले जाओगे कुछ साल पहले तुम्हारे बडे़ भईया और अब तुम . इस बात को सुनने के बाद मेरी आंखों भी नम हो गईं , फिर भी मैने खुद को संभालते हुए बोला मैं हमेशा के लिए थोड़े हीं जा रहा हूँ और यह कहते हुए मैं उनकी आंसु पोंछने लगता हूँ फिर वो मुझे अपने सिने से लगा लेती हैं ।

आखिरकार वो दिन आ हीं जाता है मै अपने सामान बांधता हूँ और उन्हें प्रणाम कर घर से पटना के लिए निकल जाता हूँ परंतु वो उस वक्त भी रो रहीं थीं और बार बार मेरी ओर देख रहीं थीं । पटना की दूरी महज मेरे घर से 25 km है । मै पटना पहुंचता हूँ और बस पड़ाव पर भईया होते है । वो मुझे रुम पर ले जाते हैं लेकिन अभी भी मेरा मन गांव मे मां के पास ही उनकी ममता के बीच फंसा हुआ था देखते देखते 5 महीने बीत जाते है बीच बीच मैं उनसे मिलने जाया करता था ।

अब एक समय एसा भी आता है कि मुझे पटना छोड़ कुछ समय के लिए बनारस जाना था और मैं पटना जंक्शन पर ट्रेन का इंतजार ही कर रहा था कि मां का कॉल आता है और उनकी आवाज मे फिर वही ममता, शायद वो आज भी रो रहीं थीं उनकी आवाज सुनने के बाद मेरी आंखें  भी नम हो गईं । आज करीब उन से दूर हुए 5 साल हो चुके हैं और जब भी मुझे मौका मिलता है उनसे मिलने गांव पहुंच जाता हुँ ।

मेरे पास माँ है!

मां जैसी दुनिया में कोई भी नहीं

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Rahul Tiwari
राहुल तिवारी 2 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वो इंडिया न्यूज़ में भी काम कर चुके हैं.
http://www.thenationfirst.com

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