कविता

आबरु

तेरी करुण कंद्रण से दिल मेरा भी रोया था, आंसू रक्त के माफिक उस वक्त जब तेरे आंखों से बहा था, जब तेरी आबरु तार तार हुआ एक आग लगी थी उस वक्त मेरे दिल मे भी, और मैं जार जार रोया था । दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी थीं जब उन दरिंकदो […]