kahani- meri pyari saloni | कहानी: मेरी प्यारी सलोनी
कहानी

कहानी: मेरी प्यारी सलोनी (वो चिड़िया नहीं जिन्दगी थी मेरी)

मैं बाहर अपने बागान में सो रहा था क्योकि गर्मी बहुत थी और मुझे प्राकृतिक हवाओं में नींद अच्छी आती है सो चला आया सोने बगानों में, इस बार आम और लीची अच्छे लगे थे… देख कर मन गद्द-गद्द हो जाता है अभी सुबह होने में लगभग 2 घंटें बाकिं थे लेकिन मन में अजीब […]

9,058 total views, 21 views today