कहानी: मेरी प्यारी सलोनी (वो चिड़िया नहीं जिन्दगी थी मेरी)

मैं बाहर अपने बागान में सो रहा था क्योकि गर्मी बहुत थी और मुझे प्राकृतिक हवाओं में नींद अच्छी आती

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