व्यंग

व्यंग: मरण दिन नाहीं ऊ त ज़बह दिन होवत

उस आदमी की समय की सुरुआत तो तब होती है जब कोई कहे भैया छोटके नानाजी के पत्नी लटकल बा और तब समझ में आती है की उस बेचारी के लिए एक एक पल कितना भारी पर रहा होगा और तो और उसे जाने का मन हो ना हो लेकिन हम तो जबरदस्ती मन्नत मांगते […]

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