कविता

मेरी आरजू

एक आरजू थी ऐ ज़िंदगी कस कर गले लगता तुझे, मुझे मालूम है तू मुझसे खफा है, फिरभी अपना होने का एहसास दिलाता तुझे, ऐ ज़िंदगी कसकर गले लगता तुझे । हर वक़्त तू मेरे साथ और मैं तेरे साथ रहूं, तेरी ही आगोस में मैं सोता हूँ, शायद इसका एहसास दिलाता तुझे, ऐ ज़िंदगी […]

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