कविता

भारत माँ के बेटे हैं हम जो रहता गंगा घाट है

भारत माँ के बेटे हैं हम जो रहता गंगा घाट है।  दरिया सा बहता हूं मैं समंदर सा आतुर हूँ वक़्त की कीमत को पहचानूँ इसीलिए मगरूर हूँ सूर्य की किरणों सा चमकता मेरा ललाट है भारत माँ के बेटे हैं हम जो रहता गंगा घाट है। शीतलता चंद्रमा से मिली प्रण लेने की शक्ति अपने […]