कविता

तेरी रूह में उतर कर मैं एक कहानी लिखता हूँ

तेरी रूह में उतर कर मैं एक कहानी लिखता हूँ  । प्यार के अल्फाज़ो से सजाए मैं तेरी नादानी लिखता हूँ, तेरी रूह में उतर कर मैं एक कहानी लिखता हूँ । लाखों अरमा हैं तेरे दिल में उस अरमा को मैं अपनी जुबानी लिखता हूँ , तेरी रूह में उतर कर मैं एक कहानी […]

कविता

मेरी आरजू

एक आरजू थी ऐ ज़िंदगी कस कर गले लगता तुझे, मुझे मालूम है तू मुझसे खफा है, फिरभी अपना होने का एहसास दिलाता तुझे, ऐ ज़िंदगी कसकर गले लगता तुझे । हर वक़्त तू मेरे साथ और मैं तेरे साथ रहूं, तेरी ही आगोस में मैं सोता हूँ, शायद इसका एहसास दिलाता तुझे, ऐ ज़िंदगी […]

कविता

आ ज़िंदगी जी लूँ तुझे

यह भी पढ़ें : तुम भी तन्हा मैं भी तन्हा आ ज़िंदगी जी लूँ तुझे, कब से फरियाद कर रहा था तू कभी तो टटोल मेरे मन को मैं ही तो तेरा अपना हूँ तेरे उज्ज्वल भविष्य का एक मात्र सपना  हूँ । बुझे हुए दीपक को जला कर कर रोशनी खुद में पीछे छोर दे […]

कविता जुर्म

कविता: गुड़िया

गुड़िया माँ मेरी आवाज सुन तु , माँ मैं तुझे पुकार रही हूँ | माँ मुझे नहीं पता की मेरे साथ क्या हुआ पर माँ मुझे बहुत ही दर्द हुआ माँ मैं तो जानती भी नहीं जो मेरे साथ हुआ एक ने मुझे बेरहमी से छुआ तो एक ने रस्सी से बांध दिया मैं पुकार […]

कविता

कतरा कतरा खुन का बह जाने दे

कतरा कतरा खुन का बह जाने दे जितना भी दर्द है हमारे अंदर रह जाने दे  समंदर भी आतुर है आगोश  मे भरने को शेष है जिन्दगी अभी हम तैयार हैं हर दर्द सहने को सफलता की सीढी हम खुद बनाएंगे अपने जीवन में चन्दमा सा प्रकाश फैलाएंगे सुर्य की तरह प्रकाश हमारा अपना होगा, […]