तुझको क्या चाहिए जिंदगी | tujhko kya chahiye zindgi!
कविता

तुझको क्या चाहिए जिंदगी!

क्यों तू इतना इम्तिहान लेती है

आखिर तुझको क्या चाहिए जिंदगी!

एक पल की खुशी फिर दर्दों-गम

क्यों तू इतना सताती है

आखिर तुझको क्या चाहिए जिंदगी!

थोड़ा सा संघर्ष देख ऐसे क्यों इतराती है

तू जानती है ऐसी सैकड़ों संघर्ष

हजारों मुश्किलों से मैं रुकूँगा नहीं, डिगूंगा नहीं

फिर भी ऐसी बाधाओं पर क्यों मुस्काती है

आखिर तुझको क्या चाहिए जिंदगी!

प्रफुल शांडिल्य

देश का द्वेष

ऐसे कैसे यूँ ही हार जाएं हम!

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Praful Shandilya
praful shandilya is a journalist, columnist and founder of "The Nation First"
http://www.thenationfirst.com

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