जब न्यूटन ने क्वारंटाइन में रहकर खोज डाले थे ‘लॉ ऑफ ग्रेविटी’, प्लेग के कारण हुआ था लॉकडाउन

इस लॉकडाउन में जब हम अपने घरों में बंद हैं तो कुछ रोचक व प्रेरणादायक क़िस्से-कहानियों के जरिए अपनी तनावपूर्ण मानसिक स्थिति को कम करने की कोशिश कर सकते हैं। जी हाँ! आज ऐसी ही एक कहानी के बारे में चर्चा करेंगे जो तकरीबन 350 साल पुरानी है और आज के हालात से हु-ब-हू मिलता-जुलता है।

वर्ष 1665, जब लंदन जानलेवा प्लेग की चपेट में आ चुका था। उस समय भी प्लेग के संक्रमण से बचाव के लिए वही तरीका अपनाया गया, जो आज कोरोनावायरस से लड़ने के लिए अपनाया जा रहा है। हालांकि प्लेग ने लगभग एक वर्ष तक इंग्लैंड के विभिन्न इलाकों में खासतौर पर लंदन और उसके इर्दगिर्द के क्षेत्रों में ख़ूब तबाही मचाई थी।

उसी समय कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के अंतर्गत ‘ट्रिनिटी कॉलेज’ में अध्यन कर रहा एक छात्र जिसने ख़ुद को उस शताब्दी के मशहूर नामों में शुमार कर लिया जिसे हम आज ‘आइज़क न्यूटन’ के नाम से जानते हैं, उसने भी इस बीमारी के संक्रमण से बचाव के लिए खुद को क्वारंनटाइन कर लिया था।

लगभग एक वर्ष तक वह एक घर में बिल्कुल अकेले क़ैद रहा जहाँ उसके अलावा कोई और नहीं था। कहते हैं अकेलेपन से दो ही परिणाम निकलते हैं या तो इंसान मानसिक स्थिति खो देता है या फिर वह कुछ ऐसा कर देता है जिसे वह समाजिक वातावरण में रहकर नहीं कर सकता।

उसी क्वारंटाइन के दौरान न्यूटन के ‘अवकलन और समाकलन कलन’ (Calculus) की शुरूआत हुई। उसने एक पेड़ के पास एक छोटी सी जगह बनाई जहाँ रोशनी बहुत कम आती थी। फिर उस रोशनी की किरणों के साथ उसने एक्सपेरिमेंट करना शुरू किया और वहीं से प्रकाशिकी(Optics) का विकास होना शुरू हुआ।

सबसे रोचक तथ्य जिसे हर छात्र जीवन में अवश्य ही पढ़ते या गुरुओं से सुनते हैं कि, एक बार न्यूटन सेब को पेड़ से गिरता देख चौंक गया और चिंतन करने लगा, ” क्यों यह सेब हमेशा सापेक्ष लम्बवत् में ही गिरता है ? यह बगल या ऊपर क्यों नहीं जाता ? बल्कि हमेशा पृथ्वी के केंद्र में ही क्यों गिरता है ?”

और फिर वहीं से ‘गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत’ (Law of gravitation) की शुरुआत हुई। माना जाता है कि वह सेब का पेड़ उसी घर की खिड़की के सामने था जिसमें न्यूटन ने खुद को क़ैद कर रखा था।

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