धोनी को किन वजहों से अभी संन्यास नहीं लेना चाहिए!

चार साल में एक बार आनेवाला क्रिकेट का विश्वकप खत्म हो चुका है। इंग्लैंड फाइनल में न्यूजीलैंड को अजीबोगरीब सिचुएशन में हराकर विश्व विजेता बन गया। टीम इंडिया सेमीफाइनल में ही हारकर बाहर हो गई थी। टीम इंडिया की हार होते धोनी के संन्यास की खबरों नें जोर पकड़ना शुरू कर दिया।

इसके दो कारण थे, एक तो धोनी हर मैच में अलग अलग स्पॉन्सर के बैट के साथ बैटिंग कर रहे थे। ऐसा लग रहा था कि वह अपने करियर में साथ देने वाली सभी कंपनियों का धन्यवाद करना चाहते हैं। दूसरा कारण सेमीफाइनल में रन आउट होने के बाद जिस तरह धोनी अपने इमोशन को छुपाने की कोशिश कर रहे थे, सबको लगा कि धोनी ने ब्लू जर्सी में आखिरी मैच खेल लिया है।

आज एक सवाल जिसका जवाब हर किसी के पास है, वह है धोनी क्या है? एक धोनी समर्थक उनकी महानता के किस्से सुनाएगा तो धोनी विरोधी उन मौकों को याद कराएगा जब धोनी चूक गए थे। भारत में पिछले कुछ समय से क्रिकेट प्रेमी धोनी को लेकर दो फाड़ हो चुके हैं। एक धड़ा चाहता है कि धोनी खेलें लेकिन विरोधी खेमा धोनी के संन्यास की वकालत करता है। दोनों के बीच युद्ध का मैदान बनता है ट्विटर, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म।

आइए आपको बताते हैं वो 4 कारण जिससे धोनी का संन्यास लेना टीम इंडिया के हित में नहीं है

1. धोनी एक खिलाड़ी के अलावा मैदान पर अघोषित कप्तान की भूमिका निभाते हैं। रेगुलर कप्तान विराट कोहली का काम नाममात्र का होता है जब धोनी मैदान पर होते हैं। कोहली की सफलता में अधिकतर योगदान धोनी का है जिसे खुद कोहली मानते हैं। एक तरफ कोहली का आईपीएल का रिकॉर्ड उठा लिजिए और दूसरी तरफ टीम इंडिया का। धोनी का महत्व पता लग जाएगा।

2. एमएस धोनी की मैच फीनिश करने की क्षमता भले हीं कम हुई हो लेकिन उनसे बढ़िया सिचुएशन का आकलन कोई नहीं कर सकता। मैदान पर भी वे सारी परिस्थितियों को बड़े कूल माइंड से पढ़ते हैं। हार्दिक पांड्या के रुप में फीनिशर खोजा जरूर गया है लेकिन फिर भी उन्हे अपने आप को बहुत साबित करना है। और धोनी बनना इतना आसान नहीं है। जल्दी विकेट गिरने पर धोनी बैटिंग को स्थायित्व देते हैं। जिस भी नंबर पर उनकी जरूरत होती है, वह हमेशा तैयार रहते हैं। 38 साल की उम्र में भी उनसे तेज रनिंग करने में कोई युवा नहीं जीत पाता है।

3. धोनी जैसा विकेटकीपर इंडिया में दूर, विश्वभर में नहीं है। सब मानते हैं कि धोनी जिस चालाकी के साथ बिजली की फूर्ति से स्टंप या रनआउट करते हैं वह किसी और के बस की बात नहीं लगती। ऐसे में धोनी के जाने से भारत को उनकी विकेटकीपिंग की कमी महसूस होगी। डीआरएस में विकेटकीपर का महत्वपूर्ण योगदान होता है क्योंकि वह गेंद को सबसे सटीक देख रहा होता है। धोनी से बेहतर डीआरएस स्पेशलिस्ट शायद ही कोई है। रनआउट करते वक्त उनका बेहद सादा एक्सप्रेशन बल्लेबाजों को मुसीबत में डाल देता है।

4. धोनी मैदान पर मौजूद अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए कोच और मेंटर हैं। भारतीय स्पिन जोड़ी कुलदीप और युजवेंद्र चहल नें एक इंटरव्यू में कहा कि धोनी भाई बताते हैं कि यहाँ गेंद डालनी है। पाकिस्तान के खिलाफ एक मैच में शाहिद आफरीदी ने सचिन तेंदुलकर की गेंद को छक्का लगा दिया।‌ धोनी नें अगली गेंद पर कहा इसे वाइड डाल सकते हैं। सचिन नें ऑफस्टंप से बाहर बॉल डाली, आफरीदी आगे निकल गए बीट हुए धोनी ने गिल्लियां उड़ा दी। धोनी के संन्यास लेने से मैदान पर बॉलरों का मेंटर खत्म हो जाएगा। भारत की बॉलिंग दुनिया में बेस्ट है और इसमें धोनी का बड़ा योगदान है।

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Ankush M Thakur

Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator

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