जस्टिस ईसा | justice Qazi Faez Isa pakistan
दुनिया

पाकिस्तान के एक जस्टिस जिन्होंने सेना से सरकार तक सबको मिर्ची लगा रखी है

1947 में जन्मा पाकिस्तान और हमेशा उसके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाला 'संकट' एक दूसरे के पर्यायवाची हैं। जब देश को चलाने वाली कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच अक्सर लड़ाई की नौबत आए तो यह उस देश के लिए अच्छे संकेत नहीं है।

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के एक प्रमुख जस्टिस हैं काजी फैज ईशा। वह सेना द्वारा आतंकवादियों को समर्थन देने के बड़े आलोचक रहे हैं। पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लगातार फैसले देने वाले फैज ईशा सरकार और सेना दोनों के निशाने पर हैं। पाकिस्तानी सेना के इशारे पर इमरान खान की सरकार नें जस्टिस ईशा और सिंध हाई कोर्ट के जज केके आगा के खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है। चूँकि कोर्ट के जज को इतनी आसानी से नहीं हटाया जा सकता इसलिए उन‌ दोनो के खिलाफ विदेशों में अपनी संपत्ति छुपाने का आरोप लगाकर जाँच होने जा रही है।

इस घटनाक्रम के बाद तमाम विशेषज्ञों नें राजनीतिक संकट का अंदेशा जताया है। इमरान खान की सरकार ठीक उसी रास्ते पर जाने की कोशिश कर रही है जिसमें कभी जनरल परवेज मुशर्रफ अपनी सत्ता गँवा बैठे थे। उस समय चीफ जस्टिस इफ्तिखार अहमद चौधरी से पंगा लेना मुशर्रफ के जी का जंजाल हो गया और फिर इसी वजह से उन्हें अपनी सत्ता का त्याग करना पड़ा।

इतिहास गवाह है कि जब जब कार्यपालिका नें न्यायपालिका से टक्कर लेने की कोशिश की है, जीत हमेशा न्यायपालिका की हुई है। सरकार और सेना से दो दो हाथ करने वाले फैज ईशा का परिचय है कि वह दिवंगत काजी मोहम्मद ईशा के बेटे हैं। मोहम्मद ईशा पाकिस्तान बनाने वाले प्रमुख नेताओं में से एक थे और मोहम्मद अली जिन्ना के खास दोस्त और सहयोगी थे।

1959 में क्वेटा में फैज ईशा का जन्म हुआ था। क्वेटा, यानि बलूचिस्तान मतलब वही क्षेत्र जहाँ पाकिस्तानी सेना कहर ढाती है। वही बलूचिस्तान जो जल्द ही विश्व मानचित्र पर अलग देश के रूप में दस्तक देने की तैयारी कर चुका है। और खास बात है कि मुशर्रफ से दो दो हाथ करने वाले इफ्तिखार चौधरी और फैज ईशा बलूचिस्तान से हीं आते हैं। आखिर जिसने बचपन से पाकिस्तानी सेना के दमन को झेला है, वह चुप कैसे रह सकता है।

अपने फैसले से रावलपिंडी के हेडक्वार्टर में मौजूद सेना के हुक्मरानों को तिलमिला देने वाले फैज ईशा जैसों के कारण हीं पाकिस्तानी जनता चैन की सांस ले पाती है। अगर इमरान खान को अपना कार्यकाल खत्म करने की जल्दी होगी तभी वह आग में हाथ डालेंगे। एक तरफ पाकिस्तान अपने आप से जंग लड़ रहा है वहीं अच्छी बातें भी सेना को नहीं पच रही।

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Ankush M Thakur
Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator
http://www.thenationfirst.com

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