एक ऐसा हीरा जो भर सकता है दो दिनो तक पूरे विश्व का पेट

हीरा का नाम तो आप सबों ने सुना ही होगा और इसकी चाहत तो हम सभी को होगी ही ।कहा जाता है कि हीरे की चमक को हर कोई बर्दास्त नही कर सकता क्योंकि उसकी चमके के आगे अच्छे अच्छों की आंखे चोंधीया जाती है । अगर आप के हाथ एक ऐसा हीरा लग जाए जो पूरे विश्व का 2 दो दिनो तक पेट भर सकता है तो जरा सोंचिए  की  आप क्या करेंगे ।आप सोंच रहे होंगे की क्या बेतुका बातें कर रहा है  क्या वाकई मे ऐसा हीरा भी है ।

हां हीरा किमती जरुर होता है लेकिन इतना भी किमती नही की पूरे विश्व का पेट भर सके तो मैं आप को बता दूं कि मै बिल्कुल भी मजाक नही कर रहा हुं । मैं जिस हीरे की बात कर रहा हुं उसका नाम कोहिनुर है । यह एक ऐसा हीरा है जो देश मे वापस आ जाए तो हमारे देश से गरीबी का नामो नीशान ही मिट जाएगा ।

क्या रहा है कोहिनुर हीरा का इतिहास

कोहिनुर भारत मे सर्वप्रथम गोलकुंडा के खान से प्राप्त हुआ था । इस जगह को आज आंध्र प्रदेश के नाम से जाना जाता है । यह हीरा वहां के खान मे काम कर रहे एक मजदूर को मिला जिसने तत्कालिन शासक प्रतापरुद्रदेव को सौंप दिया  । उसके बाद सल्तनत काल के सेनापत्ति मलित काफूर ने 1310 ई. मे अपने शासक अलाउदिन खिलजी को भेंट कर दिया । यह हीरा मलिक काफूर को 1309 मे काकतीय वंश के शासक प्रताप रुद्रदेव पर आक्रमण के दौरान दिया गया था ।

इसके बाद यह दिल्ली सल्तनत के शासकों के पास चला गया और उसके बाद सिकन्दर लोदी के साथ यह हीरा आगरा आ गया उसके बाद ग्वालियर के राजा विक्रमजित सिंह ने आगरा पर आक्रमण कर इसे अपने पास रख लिया और फिर इस हीरा को हुमायूं ने विक्रमजित सिंह से हांसिल कर लिया । हुमायूं के बाद यह हीरा मुगल शासको के मुकुट की शोभा बढ़ा रहा ।

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1739 मे इस हीरा को मुहम्मद शाह रंगीला से जीत कर ईरान का नेपोलियन कहा जाने वाला नादिर शाह अपने पास रखा लिया लेकिन उसके मृत्यु के बाद दुर्रेदुर्रानी अहमदशाह आब्दाली का अधिकार हो गया और उसके बाद शाहशुजा को प्राप्त हुआ और 1809 मे शाहशुजा ने महाराजा रणजीत सिंह को भेंट कर दिया यानी की फिर एक बार यह हीरा भारतीय शासको के हाथ मे आ गया लेकिन काफि दिनो तक रह नही पाया और 30 मार्च 1849 को  राजा दिलीप सिंह अंग्रेजों से पराजित हो गये और भारत को एक बार फिर इस हीरा से हाथ धोना पड़ा ।

और उसके बाद तत्कालिन गवर्नर लार्ड डलहौजी ने ब्रिटेन कि महारानी को भेंट  कर दिया तब से लेकर आज तक यह हीरा ब्रिटेन की खुबशुरती मे चार चांद लगा रहा है आज भी यह हीरा बर्किंघम पैलेस मे सुरक्षित है । अगर इस हीरा की वजन की बात करें तो हुमायूं के समय तक 320 रत्ती था जिसे अगर बेचा जाए तो यह पूरे संसार को 2 दिनो तक भोज कराया जा सकता है ।

यह केवल एक हीरा नही है यह भारतीय संस्कृति की धरोहर है जिसे सरकार भारत मे वापस लाने की पूरजोर कोशिश कर रही है लेकिन शायद इसे भारत मे वापस लाना असम्भव सा प्रतीत हो रहा है क्योंकि ऐसे बेसकिमती खजाने को कौन वापस करना चाहेगा । आपको बता दें की इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर युनिफिकेशन ऑफ प्राइवेट लॉ के के एक बैठक मे यह तय किया गया कि अगर किसी दूसरे देश मे किसे देश के मौजुद है तो वह इस खजाने को वापस पाने के लिए वह दावा कर सकता है ।

ब्रिटेन सरकार ने इस मामले मे एक टीम का गठन किया था जिसने ब्रिटेन सरकार को यह सुझाव दिया कि वह इस संधि पर हस्ताक्षर करने के बदले चोरी किए गये या अवैध खजानो के कारोबार के खिलाफ 1970 की युनोस्को संधि पर हस्ताक्षर करे । समिती ने सरकार को कुल  16 सिफारिशें दि हैं जिसपर ब्रिटेन सरकार विचार कर रही है ।

ब्रिटेन अगर इस संधि पर हस्ताक्षर करता है तो सम्भव है कि एक दिन भारत का धरोहर कोहिनु भारत के म्युजियम की शोभा बढ़ाता हुआ नजर आए । वैसे तो ब्रिटेन से भारत का सम्बंध काफी मधुर है लेकिन बात सम्बंध की नही बात खजाने की है जिसे ब्रिटेन इतनी आसानी से भारत के हाथो मे सौंपने को तैयार नही होगा ।

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Rahul Tiwari

राहुल तिवारी 2 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वो इंडिया न्यूज़ में भी काम कर चुके हैं.

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