बिहार में वज्रपात से हुई 83 लोगों की मौत, 28 जून तक वज्रपात का खतरा

बिहार इस वक़्त कोरोना से झूझ रहा है, लगभग हर दिन कोरोना के ढेरों मरीज़ मिल रहें है। और अब प्रकृति की भी दुगनी मार झेल रहा है। गुरुवार को राज्य में 83 लोगों की वज्रपात से मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वज्रपात से मौत पर दुख व्यक्त किया है साथ ही उन्होंने मृतकों के आश्रितों को तत्काल चार-चार लाख रुपये अनुग्रह अनुदान देने का निर्देश दिया है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आपदा की इस घड़ी में वे प्रभावित परिवारों के साथ हैं। वज्रपात से गोपालगंज में 13, पूर्वी चंपारण में पांच, सीवान में छह, दरभंगा में पांच, बांका में पांच, भागलपुर में छह, खगड़िया में तीन, मधुबनी में आठ, पश्चिम चंपारण में दो, समस्तीपुर में एक, शिवहर में एक, किशनगंज में दो, सारण में एक, जहानाबाद में दो, सीतामढ़ी में एक, जमुई में दो, नवादा में आठ, पूर्णिया में दो, सुपौल में दो, औरंगाबाद में तीन, बक्सर में दो, मधेपुरा में एक और कैमूर में दो लोगों की मृत्यु हुई है। उत्तरी बिहार के अधिकांश जिलों में 28 जून तक वज्रपात का खतरा बना हुआ है।

पटना मौसम केंद्र के निदेशक विवेक सिन्हा का कहना है कि वर्तमान में बारिश के दौरान लोगों को घर से बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए। इस दौरान बिजली गिरने की आशंका रहती है। कोशिश करें कि पक्के घर में सुरक्षित रहें। बारिश के दौरान प्राय: लोग खुले में पेड़ों के नीचे छिपने की कोशिश करते हैं। हरे पेड़ बिजली के लिए अत्यंत सुचालक होते हैं। ये बिजली को अपनी ओर तेजी से आकर्षित करते हैं। इसलिए अक्सर देखा जाता है कि पेड़ों पर बिजली गिरती है। ऊंचे पेड़ पहले उसके शिकार होते हैं।

बिजली कड़कने के दौरान खुले में मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में मोबाइल से कॉल न करें। मोबाइल को तत्काल स्विच ऑफ कर दें। जब तक आकाश साफ नहीं हो, उसे ऑन न करें।

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