भागवत के ‘हिंदू देशद्रोही नहीं हो सकते’ वाले बयान पर ओवैसी का पलटवार, कहा- गुजरात दंगों के बारे में क्या बोलेंगे?

मौजूदा समय में देश में नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन चल रहे हैं। कई राज्यों के किसान दिल्ली की बॉर्डरों पर डेरा डाले हुए है और केंद्र सरकार से लगातार इस कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इस कड़ाके की ठंड में दिल्ली के बॉर्डरों पर आंदोलन कर रहे किसानों में अब तक 40 से ज्यादा किसानों की मौत हो गई है। विपक्षी पार्टियां इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर है। इसी बीच राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। उनके इस बयान पर विपक्षी पार्टियों की ओर से तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी मोहन भागवत के बयान को आड़े हाथों लेते हुए पलटवार किया है।

जानें क्या है पूरा मामला?

दरअसल, बीते दिन शुक्रवार को ‘मेकिंग ऑफ अ हिंदू पेट्रिएट- बैकग्राउंड ऑफ गांधीजीज हिंद स्वराज’ नाम की एक किताब का विमोचन करने आरएसएस प्रमुख दिल्ली पहुंचे थे। किताब का विमोचन करते हुए मोहन भागवत ने कहा था कि अगर कोई हिंदू है तो वह देशभक्त ही होगा, क्योंकि यही हमारे धर्म के मूल में है और यहीं हिंदुओं की प्रकृति भी है। उन्होंने आगे कहा था कि चाहे परिस्थिति जो भी हो लेकिन कोई हिंदू कभी भी देशद्रोही नहीं हो सकता।

मोहन भागवत के बयान पर पलटवार करते हुए एआईएमआईएम के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘क्या भागवत जवाब देंगे: वे बापू के हत्यारे गोडसे के बारे में क्या बोलेंगे? नेली कत्लेआम (असम) के लिए जिम्मेदार आदमी के बारे क्या कहेंगे? साल 1984 के सिख विरोधी दंगो और 2002 के गुजरात दंगों के बारे में क्या बोलेंगे?’

‘आरएसएस की जाहिल विचारधारा….’

असदुद्दीन ओवैसी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए आगे लिखा, ये मानना तर्कसंगत है कि अधिकांश भारतीय देशभक्त हैं भले ही उनका धर्म कुछ भी हो। लेकिन ये केवल आरएसएस की जाहिल विचारधारा में ही है कि केवल एक धर्म के अनुयायियों को देशभक्ति के प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं जबकि अन्य को अपना जीवन यह साबित करने में बिताना पड़ता है कि उन्हें भी यहां रहने का अधिकार है और वे अपने आप को भारतीय कह सकते हैं।

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