अटल बिहार वाजपेयी: एक स्वतंत्रता सेनानी जो लगातार 3 बार बनें भारत के प्रधानमंत्री

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में शुरु से ही नेताओं की भरमार रही है। कुछ लोग केवल नाम के ही नेता थे तो कुछ लोगों ने अपने काम की बदौलत विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाई और देश का नाम रोशन किया। इन्हीं में से एक थे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। जिनके समय में देश में सन् 1998 में दूसरी बार परमाणु परीक्षण हुआ और वह सफल भी रहा। इससे पहले भारत ने सन् 1974 में परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी ताकत का लोहा मनवाया था।

स्वतंत्रता सेनानी के रुप में हुई थी राजनीतिक करियर की शुरुआत

25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की राजनीति को कई विभिन्न मोड़ दिए। विपक्ष के नेताओं के साथ उनका उत्तम व्यवहार आज भी अन्य नेताओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु के बाद अटल बिहार वाजपेयी एक मात्र नेता रहे जिन्होंने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद संभाला। वह भारत के सबसे सम्मानीय और प्रेरक राजनीतिज्ञों में से एक रहे।

उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत एक स्वतंत्रता सेनानी के रुप में हुई। सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी। इसके कुछ समय बाद ही उनकी मुलाकात श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई, जो भारतीय जनसंघ के नेता थे। बताया जाता है कि उनके राजनीतिक एजेंडे में वाजपेयी ने सहयोग किया। स्वास्थ्य समस्याओं के चलते मुखर्जी की जल्द ही मृत्यु हो गई और बीजेएस (भारतीय जन संघ) की जिम्मेदारी वाजपेयी पर आ गई।

उन्होंने जनसंघ की कमान संभाली और संगठन के विचारों और एजेंडे को आगे बढ़ाया। सन् 1954 में अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार बलरामपुर लोकसभा सीट से संसद निर्वाचित हुए। उनकी विस्तृत नजरिए और जानकारी ने उन्हें राजनीतिक जगत में सम्मान और स्थान दिलाने में मदद की। सन् 1977 में मोरारजी देसाई सरकार में उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया। चीन के साथ संबंधों पर चर्चा करने के लिए 2 साल बाद उन्होंने चीन की यात्रा भी की।

1980 में की बीजेपी की स्थापना

खबरों के मुताबिक सन् 1979 में जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) में तकरार के बाद वाजपेयी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद सन् 1980 में आरएसएस के लालकृष्ण आडवाणी और भैरो सिंह शेखावत जैसे कुछ बड़े नेताओं के साथ उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी। स्थापना के बाद 5 साल वाजपेयी इस पार्टी के अध्यक्ष भी रहे। बीजेपी को पहली बार लोकसभा चुनाव 1996 में सत्ता में आने का मौका मिला। कुशल व्यक्तित्व के धनी अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री चुने गए। लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाने के कारण उनकी सरकार गिर गई और मात्र 13 दिनों के बाद ही उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

1998 में दूसरी बार पीएम बने वाजपेयी

1998 के चुनाव में बीजेपी ने अन्य छोटी पार्टियों के साथ मिलकर दोबारा सरकार बनाई। वाजपेयी दूसरे बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन ऑल इंडिया द्रविड़ मुन्नेत्र कागजम ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया और मात्र 13 महीनें में ही एनडीए सरकार धराशाई हो गई। लेकिन ये 13 महीनें बीजेपी के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुए। वाजपेयी के इस 13 महीनें के कार्यकाल में कई बड़े काम हुए, जिनमें मई 1998 में राजस्थान के पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण भी शामिल है।

जिसके बाद लोकसभा चुनाव 1999 में एनडीए ने फिर सरकार बनाई और अटल बिहारी वाजपेयी तीसरे बार प्रधानमंत्री चुने गए। इस बार उन्होंने पूरे 5 साल तक शासन किया और ऐसा करने वाली पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। उन्होंने अपने शासनकाल में आर्थिक सुधार और निजी क्षेत्र के प्रोत्साहन हेतु कई योजनाएं शुरु की। उन्होंने विदेशी निवेश और सूचना तकनीकी के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा दिया।

वाजपेयी ने 2005 में लिया था राजनीति से सन्यास

लोकसभा चुनाव 2005 में अटल बिहार वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन एकबार फिर चुनावी दंगल में उतरा। लेकिन कांग्रेस समर्थित यूपीए गठबंधन ने चुनाव में जीत हासिल की और डॉ मनमोहन सिंह पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने। लोकसभा चुनाव 2005 में हार के कुछ ही दिनों बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीतिक सन्यास की घोषणा कर दी।
आजीवन अविवाहित रहे वाजपेयी को साल 2009 में दौरा पड़ा था, जिसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। 16 अगस्त 2018 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में उन्होंने अंतिम सांस ली और परलोक सिधार गए। उनकी दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्या ने उन्हें मुखाग्नि दी।

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