बीहड़, मैं और लड़की भाग -2

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क्रमशः बारिश जोरों पर थी नैना के बापू अभी आधे रास्तें में ही थे पर बारिश अपनी धुन में ही बरसे जा रही थी बिजली जोरो से कड़क रही थी इस सुनसान रास्तें में बिजली की कड़क से जंगल का राजा भी सहम जाए ये तो एक बूढ़ा था फिर भी नैना के बापू अपने भेड़ को बारिश से बचाने के लिए चले जा रहा था ।

इधर नैना मुसाफ़िर के साथ अकेली थी अँधेरी और बरसती रात में ।

नैना के बापू के जाने के बाद पता नहीं मैं क्यों राहत महसूस कर रहा था मुझे अब लग रहा था नैना से खूब बातें करेंगे और भी बहुत कुछ ! मैं बस ख्यालों में खोया हुआ था तभी नैना की आवाज़ मेरे कान के पर्दे से टकराई और निकल गई मैं नैना के सपनो में इस कदर खोया हुआ था कि कुछ सुन ही नही पाया लेकिन एक बार फ़िर वही आवाज़ दोहराई वो बोल रही थी आप का खाट लगा दिया है अब आप आराम कर लीजिए मैं घबरा कर जी.. जी हां.. बोला ! और वो दुहरी से घर में चली गई मैं खाट पर बैठ गया बाहर बारिश की बूंदा बुंदी शुरु हो चुकी थी ।

रात धीरे धीरे गहराती जा रही थी और बारिश भी ! मैं अपने कम्बल में लिपटा करवटें ले रहा था कि अचानक से मुझे एक कंपकंपी की आवाज सुनाई दी मैंने अपने कम्बल से मुंह निकाल कर बाहर की तरफ देखा तो अजीब सा नजारा था बारिश उफान मार कर ओले के साथ बरस रही थी मेरे खाट के चारो तरफ पानी जमा था ।

मैं झट खाट से उठा मुझे एहसास हो गया था ये कंपकंपी की आवाज़ बाहर से नही बल्कि घर से ही आ रही थी मैं कम्बल लपेट कर खाट से उठा और नीचे पानी की परवाह किये बिना घर की तरफ चल दिया मैं जैसे ही घर के चौखट से झांक के अंदर देखा तो नजारा देखने लायक़ था । अंदर घुप अंधेरा, बारिश के पानी छत को चीर कर टप टप चु रहा था खाट भी चारो तरफ़ भींग गया था बेचारी नैना खाट के बीच में ठंड और बारिश से संघर्ष कर रही थी मैं घर के अंदर प्रवेश किया तो नैना की आवाज़ आई कक्क कक्क कौन है? वह कंपकपाती आवाज़ में बोली !

मैं हूँ नैना जी ! अरे आप तो ठंड और बारिश से बेहाल हैं कम्बल भी नही ओढ़ रखी है मैंने बेड पर सरसरी नजर दौड़ाई कही कम्बल था ही नही शायद घर में एक ही कम्बल था जो मुझे दे दिया गया था । मैंने झट से अपना कम्बल उतारा और नैना के शरीर पर रख दिया और उसे उठने को कहा लेकिन ठंड से उसका पाव अकड़ गया था सो उठ नही पा रही थी मैं ने झट से उसे अपने दोनों हाथों में उठाया और दुहरी पर लगी खाट जिसपर मैं सोया था ला के रख दिया बारिश अभी भी उफाने मार कर बरस रही थी ।

मैंने पहली बार किसी लड़की को छुआ था जब मैं नैना को उठा कर खाट तक लेकर आया मेरे अंदर एक अजीब सी झुरझुरी पैदा हो रही थी । फिर भी मैं अपने आप को संभाले उसे खाट तक ले आया था । नैना अभी भी कांप रही थी मैं ने सर छू के देखा ज्वार से पूरा शरीर तप रहा था और वो रो रही थी मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था मैं क्या करूँ बारिश थमने का नाम ही नही ले रही थी और इसके बापु का भी कोई अता-पता नही था इस अनजान जगह और अनजान घर मे इसके ज्वार की दवा कहाँ से लाऊ ?

मैं इसी उधेड़बुन में था कि तभी मुझे वही परछाई दिखी जो मुझे रास्ते में दिखा था मैं सन्न रह गया लेकिन पलक झपकते ही गायब। नैना का ज्वार और कंपकंपी बढ़ती ही जा रही थी और मैं अभी तक कोई उपाय नही ढूंढ़ पाया था अचानक नैना की कंपकपी बन्द हो गईं और उसका शरीर सींथल पर गया शायद वो बेहोश हो चूकि थी.

नैना को होश में लाने के लिए मै इधर उधर कुछ ढूंढने लगा लेकिन मै क्या ढूंढने की कोशिश कर रहा था ये मुझे भी नहीं पता था क्योंकि मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया था लेकिन अचानक मुझे एक उपाय सुझा पर ये गलत था और शायद आखरी रास्ता भी वो रास्ता था उसके मुंह में अपना गर्म हवा छोड़ना और एक मर्द की जिस्म की गर्मी देना शायद इसी उपाय से नैना के प्राण बचाया जा सकता था । ‘’लेकिन मैं कैसे ये कर सकता हूँ ये ये तो… पाप है मगर नही किया तो ये मर जाएगी ।‘’

आखिर ये सब आज ही क्यों हो रहा था इससे पहले भी तो इस  तरह के बारिश और ओले गिरे होंगे शायद हाँ या ना कुछ कह भी कैसे सकते है और जो बता सकती थी वो तो बेहोश थी ।

मैंने दिल पर पत्थर रख सब मोह माया त्याग अपना मुंह नैना के मुंह पर रख दिया शरीर मे बिजली सी कौंधी  मैं उसके मुंह पर मुँह रख कर उसके अंदर गर्म हवा छोड़ने लगा और अपने जिस्म की गर्मी भी करने लगा ये प्रक्रिया करते हुए दो मिनट हो चुके थे लेकिन कोई फ़ायदा नहीं मैंने सांसे छोड़ना तेज कर दिया और तभी नैना मचलते हुए आंख खोल दी ! और उसने जब मुझे अपने ऊपर पाया तो ज़ोरदार झटके से उठ बैठी पता नही इतनी ताकत कहाँ से चली आई थी उसमें..? और फिर मैंने झट से अपना तन ढका।

नैना की आंखें लाल हो चुकी थी क्योंकि वो बहुत जोर जोर से रो रही थी मैं ने नैना को बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन वो चुप होने को तैयार ही नही थी । “नैना मैं तुझे मरते हुए नही देख सकता था क्योंकि पहली नज़र में ही मुझे तुम से प्यार हो गया था तुम्हारी जो हालत हो रखी थी मुझसे देखा नही जा रहा था मजबूरी में मैंने ये फैसला लिया क्योकि मुझे कोई उपाय नही सूझ रहा था मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ तुम्हारे बिना मेरा जीवन अधूरा सा लगता है मैं तुमसे शादी करूँगा ये सब मैं एक सांस में बोल गया था ।“

नैना अब चुप हो कर मुझे एक टक देख रही थी औऱ अचानक वो मेरे सीने से आकर लग गयी ।और बोली इतना प्यार करते हो मुझआआआआआआ… ???  मैं कुछ समझ पाता इससे पहले ही दो जोरदार प्रहार हम दोनों के सिर पर हुई. नैना तो उसी एक ही प्रहार में ढेर हो चुकीं थी लेकिन मैं पलटा पर फिर एक बार जोरदार प्रहार मेरे सिर पर हुई और मैं ढेर होते हुए अपनी ओझल आंखों से देखा तो और कोई नही था साक्षात नैना के बापू थे मेरा अंतिम शब्द था बापू आखिर ऐसा क्क्क्कक क्यूऊउ ??????

और शायद मुझें जो परछाई दिखाई दे दे कर विलुप्त हो जाती थी वो और कुछ नहीं मेरी मौत का सौदागर ही था जो मेरे मौत का सौदा ऑफर डिस्काउंट यानि buy वन गेट two पर कर के ले जा रहा था ।

नोट: समय ने अपना खेल इस कदर खेला की एक छन में ही शायद सच्चा प्यार करनेवाला प्रेमी जोड़ा इस बीहड़ में गुमनाम हो कर रह गया ।

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Pushpam Savarn

pushpam is a content creator and a journalist

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