चुनावी रंग में रंगा बिहार, तेजस्वी ने ख़ुद सीढ़ी चढ़ लगाई नीतीश सरकार के खिलाफ पोस्टर

कोरोना और लॉकडाउन के बीच बिहार में चुनावी रंग धीरे-धीरे चढ़ने लगा है, पार्टियों ने अपनी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी है । इसी दौर में हर कोई किसी न किसी तरह से ख़ुद को भुनाने में लगा हुआ है ।

ताज़ा ख़बर राजधानी पटना स्थित राजद के पार्टी ऑफिस से आ रही है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शनिवार को अचानक पटना स्थित अपने ऑफिस पहुंचे और कार्यकर्ताओं की मदद से खुद पोस्टर और होर्डिंग लगाने लगे। तेजस्वी यादव ने समर्थकों की मदद से राजद कार्यालय में श्रमिकों के मुद्दों को लेकर खुद पोस्टर लगाया।

उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है कि श्रमिकों का अपमान करने वाली बिहार सरकार के खिलाफ हर गली-मोहल्ले, टोले, पंचायत, प्रखंड और ज़िलास्तर पर इस चिट्ठी के बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाकर राज्य सरकार की ग़रीबों के प्रति सोच को उजागर करें।

पुलिस मुख्यालय की ओर से श्रमिकों को राज्य के लिए खतरा बताने वाली चिट्ठी के होर्डिंग को तेजस्वी यादव ने स्वयं लगाया। बकौल तेजस्वी कहते हैं सरकार श्रमवीरों को अपराधी समझती है। तेजस्वी यादव ने पुलिस मुख्यालय से जारी उस पत्र पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया है ‘प्रवासी मजदूर परेशानी में हैं। कुछ गलत कर सकते हैं। इससे विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होगी। लिहाजा पुलिस इसकी तैयारी पूरी कर ले।’पार्टी कार्यालय में शुक्रवार को प्रेस कान्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शायद मजदूरों को अपराधी समझती है।

पत्रकारों के यह बताने पर कि मुख्यालय ने इस पत्र को वापस ले लिया है, नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इससे मानसिकता नहीं बदल जाती है। उन्होंने पत्र की प्रति को वहीं फाड़ डाला। साथ ही अपील की कि सात जून को थाली बजाकर इसका विरोध करें। तेजस्वी यादव ने कहा कि एडीजी के पत्र में साफ कहा गया है कि श्रमिकों के आने से अपराध बढ़ सकता है। इसके लिए पुलिस को तैयारी करने के निर्देश दिये गए हैं। सरकार बताए कि श्रमवीर अगर परेशानी में हैं तो इसका जिम्मेवार कौन है।

तेजस्वी यादव ने खुद से राजद दफ्तर के बाहर बैनर लगाया और इस पोस्टर के जरिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कई सवाल पूछे। उन्होंने पोस्टर के जरिए सवाल किया उन्हें बिहार के श्रमवीर में अपराधी क्यों लगे? पोस्टर के अंत में लिखा गया है, “नीतीश श्रम करो। श्रमिकों को सम्मान नहीं दे सकते तो अपमान क्यों।”

तेजस्वी द्वारा लगाए गए होर्डिग का शाीर्षक ‘नीतीश कुमार की श्रमवीरों के बारे में घृणित सोच’ है। इसमें मुख्यमंत्री से सवाल पूछा गया है कि उन्हें बिहारी श्रमिक गुंडे क्यों दिखाई दिए?

आपको बताते चले कि इस मामले में डीजीपी ने सफ़ाई पेश की है कि पुलिस मुख्यालय को विभिन्न स्रोतों से अलग-अलग तरह की सूचनाएं प्राप्त होती रहती हैं। इसी प्रकार प्रवासियों को लेकर एक सूचना आई थी, जिसे एडीजी ने सभी जिलों में भेज दिया था। बाद में एडीजी को लगा कि यह सूचना नहीं भेजी जानी चाहिए थी, इसलिए उन्होंने इसे वापस भी ले लिया। इस मौके पर एडीजी विधि-व्यवस्था अमित कुमार भी मौजूद थे। गौरतलब हो कि एडीजी ने अपने पत्र में कहा था कि राज्य में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों का आगमन हुआ है, जो अन्य राज्यों में श्रमिक के रूप में कार्यरत थे। इसका प्रतिकूल असर राज्य की विधि-व्यवस्था पर पड़ सकता है।

तेजस्वी यादव ने शनिवार को ट्वीट कर लिखा, “भाजपा के अधीन कार्य कर रहे आदरणीय नीतीश कुमार जी द्वारा बिहार के श्रमवीरों के संबंध में गृहविभाग से एक चिट्ठी जारी करवाई गई जिसमें श्रमिक भाइयों के बारे में बेहद अपमानजनक और अशोभनीय टिप्पणियां की गयी है। इस चिट्ठी में श्रमिकों को चोर, लुटेरा, गुंडा और अपराधी कहा गया है।”

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