किसान आंदोलन में पड़ी फूट! किसान नेता राकेश टिकैत पर लगे आंदोलन को बेचने के आरोप

नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन पिछले 70 दिनों से चल रहा है। किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कानून वापसी नहीं होगी वे घर नहीं लौटेंगे। 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा के बाद कई किसान संगठनों ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की थी। लेकिन भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और नेता राकेश टिकैत की आंसुओं ने माहौल ही बदल कर रख दिया।

तब से लाखों की संख्या में किसान आंदोलन स्थल पर पहुंच चुके हैं। कई राज्यों में किसान आंदोलन के समर्थन में महापंचायत भी हो रही है। इसी बीच अब किसान नेताओं में फूट भी देखने को मिल रही है। किसान नेता गुरुनाम सिंह चढ़ूनी ने किसान नेताओं पर आंदोलन को बेचने का ओरप लगाया है।

राकेश टिकैत पर बरसे चढूनी

भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरुनाम सिंह चढूनी ने भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत पर किसान आंदोलन को बेचने का गंभीर आरोप लगाया है। चढूनी ने बीते दिन बुधवार को एक वीडियो जारी पर आरोप लगाया था कि राकेश टिकैत भारतीय जनता पार्टी की गोद में बैठे हैं। उन्होंने किसान आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए किसानों का धन्यवाद किया। किसान नेता ने दावा किया कि कुछ किसान संगठन किसान आंदोलन को सरकार के पास बेचना चाह रहे हैं और कह रहे हैं कि सरकार को जो बात करनी है वह उनसे करे।

किसान नेता ने कहा, जो संगठन सरकार से बात करने के लिए जा रहे हैं मैं उनसे प्रर्थना करता हूं कि इन किसानों पर रहम खाएं और किसानों का न बेचें। अनेक किसान संगठन अपनी निजी फायदे के लिए अपने सगठंन को बेच रहे हैं। अब टिकैत भी किसान आंदोलन को अपना आंदोलन बता रहे हैं। भाकियू का हरियाणा प्रदेश प्रधान भी भाजपा की गोद में बैठा है। चढूनी ने यह भी दावा किया कि टिकैत ने उनके खिलाफ दो मामले दर्ज कराए हैं।

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चढूनी पर लगे थे 10 करोड़ लेने के आरोप

बता दें, पिछले दिनों भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रधान गुरुनाम सिंह चढूनी पर कई तरह के आरोप लगे थे। उनपर आम आदमी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं से मिलने के आरोप लगे थे। जिसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने उन्हें 7 सदस्यों की कमेटी औऱ सरकार के साथ वार्ता करने वाली कमेटी से हटा दिया। चढूनी पर 10 करोड़ लेकर हरियाणा में सरकार को अस्थिर करने के आरोप भी लगे थे।

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