दलितों की हिंसा से जल रहा है देश, कई राज्यों में लगे कर्फ्यू

आज हमारा पूरा देश जल रहा है और दलितों के नाम पर राजनीतिक पार्टियां इस आग में अपने- अपने हाथ अपने-अपने तरीकों से सेक रही है । वैसे तो हमेशा से ही भारत की राजनीति धर्मगत, जातिगत रहा है लेकिन कुछ सालों से कुछ ज़्यादा ही जातिगत रोटी हर राजनीतिक पार्टियां सेंकने में लगी हैं चाहें वो बीजेपी हो या फिर कांग्रेस दोनों ही इस खेल के माहिर खिलाड़ी है क्यों न  मंचों पर खुद को दलित का बेटा बाता कर, चाय वाले का बेटा बात कर अपनी रोटी सेकने वाले देश के प्रधानमंत्री ही हो , हर कोई जातिगत राजनीति करने में मशगूल है । और आज शायद इन्हीं राजनीतिक पार्टियों की देन हैं जो देश मे sc-st act को लेकर आंदोलन किया जा रहा है ।

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क्या है कारण ?

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने sc-st एक्ट का गलत इस्तेमाल होने से बचने के लिए इसमें कुछ बदलाव किये थे जिसके बाद कई दलित संगठनों ने कहा कि इस एक्ट में संसोधन करके देश के कानून को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है । इन संगठनों का कहना है कि अनुसूचित जाती , जनजाति अत्याचार निवारण कानून में किये गए बादलों को पहले जैसा ही किया जाए । यह एक्ट 1989 में लागू किया गया था जिसके बाद कोर्ट ने इसमें पहली बार संसोधन किये हैं । वैसे तो इस आंदोलन का असर पूरे देश में है लेकिन कुछ राज्य बिहार , उत्तर प्रदेश पंजाब,हरियाणा राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में इस आंदोलन का भयावह रूप देखा जा रहा है । लोग अपने ही प्रोपर्टी को सरकारी प्रोपर्टी समझ कर आग के हवाले कर रहे हैं। कई लोगों की मौत हो चुकी है सैकड़ों लोग घायल हो चुके हैं । लेकिन इन सब से फायदा किसका , मेरे हिसाब से सिर्फ राजनीतिक पार्टियों का , और नुकसान हमारा और आपका । इस लिए The Nation First आप सभी से आग्रह कर रहा है ऐसे लोगों का शिकार न बनें जो केवल आपको वोटबैंक समझते हैं ।

इन 6 वजहों से दलितों ने आज भारत बंद किया है :-

  • सुप्रीम कोर्ट ने SC-ST एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी.
  • SC-ST एक्ट में सीधे गिरफ्तारी नहीं करने का आदेश दिया है.
  • पुलिस को 7 दिन के अंदर जांच के बाद कार्रवाई का आदेश है.
  • SC- ST एक्ट में गिरफ्तारी के लिए एसएसपी की मंजूरी जरूरी होगी.
  • SC-ST एक्ट के तहत दर्ज केस में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दी गई है
  • एक्ट के तहत सरकारी अधिकारी गिरफ्तारी के लिए उच्च अधिकारी से मंजूरी जरूरी होगी.
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Rahul Tiwari

राहुल तिवारी 2 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वो इंडिया न्यूज़ में भी काम कर चुके हैं.

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