विश्लेषण: डॉक्टरों की आज देश भर में हड़ताल, जानें क्या है पूरा मामला ?

कोलकाता से हुई शुरुआत और आज पूरे देश में डॉक्टर्स हड़ताल कर सड़क पर उतर गए हैं. जहाँ एक ओर डॉक्टरों को धरती पर भगवान माना जाता है, जहाँ डॉक्टर्स अपनी ट्रेनिंग के दौरान ये कसम खाते है की वो अपना काम पेशेवर ढंग से करेंगे, किसी जरूरतमंद को इलाज से मना नहीं करेंगे. वहीं, पिछले कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल के साथ-साथ देश के कई और राज्यों के डॉक्टरों ने इस कसम को ताक पर रख दिया है.

इस हड़ताल में सरकारी डॉक्टरों के अलावा प्राइवेट डॉक्टर भी शामिल हो गए हैं. इस वजह से देश की ज्यादातर आबादी वाले इलाके में स्वास्थ का एकलौता ढाचा बिगड़ चूका है. अब सवाल ये है कि आखिर क्या वजह थी की इन डॉक्टरों को अपनी कसम तोडनी पड़ी, आखिर क्यों डॉक्टर अस्पताल में इलाज करने के बजाए सड़क पर धरना प्रदर्शन करने के लिए उतर गए ? तो चलिए हम आपको बताते है इस विशलेषण के द्वारा की इसकी शुरुआत कहाँ से हुई और क्यों ?

75 साल के बुजुर्ग की मौत की वजह से शुरू हुआ ये मामला

कोलकाता के नील रत्न सरकार मेडिकल कालेज और अस्पताल में 11 जून को इलाज के दौरान एक 75 साल के बुजुर्ग (मोहम्मद सईद) की मौत हो गई. मौत की वजह डॉक्टरों की लापरवाही बताते हुए परिजनों ने तीन डॉक्टरों से बदसलूकी के साथ-साथ हाथापाई भी की. अस्पताल के कर्मचारियों की माने तो उसी रात 200 से भी अधिक लोग ट्रक में आए और ड्यूटी पे तैनात डॉक्टरों को बुरी तरह पिटा, इस हमले में दो जूनियर डॉक्टर घायल हो गए थे, जिनमें से एक की हालत बहुत गंभीर हो गई. इसके बाद से डॉक्टरों ने अस्पताल के गेट पर ताला लगाकर पूरा काम ठप कर दिया. डॉक्टरों का कहना था कि जब तक सुरक्षा और उनकी अन्य मांगे पूरी नहीं होती है तब तक वो काम पर नहीं लौटेंगे और फिर गेट के सामने धरना पर बैठ गए. इस घटना की खबर मिलते ही राज्य के अन्य चिकित्सकों नें भी अपना काम छोड़ एन.आर.एस. मेडिकल कालेज के समर्थन में आ गए और धीरे-धीरे ये प्रदर्शन पश्चिम बंगाल से बाहर कई राज्यों में फ़ैल गया.

डॉक्टरों ने ममता बनर्जी के निर्देशों को मानने से किया इंकार

राज्य में हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने काम पर लौटने को कहा लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. ममता ने डॉक्टरों से कहा कि अगर वो चार घंटे के भीतर अपने काम पर नहीं लौटें तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. लेकिन डॉक्टरों ने इस फरमान को मानने से इंकार कर दिया और कहा कि सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा संबंधी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा.

वहीं, डॉक्टरों पर हमले के विरोध में एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. सैबल कुमार मुखर्जी और वाइस प्रिंसिपल प्रो. सौरभ चट्टोपाध्याय ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दिया आश्वासन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने गुरुवार को कोलकाता में डॉक्टरों के खिलाफ हुई हिंसा की निंदा करते हुए मरीजों और उनके परिजनों से संयम बरतने का अनुरोध किया और कहा कि वह सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के समक्ष डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा उठाएंगे.
एक आधिकारिक बयान में उन्होंने डॉक्टरों से सुनिश्चित करने को कहा कि मरीजों के लिए जरूरी सेवाएं बाधित न हो. साथ ही डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा की हालिया घटनाओं पर चिंता प्रकट करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने ये भी कहा कि डॉक्टरों के लिए काम का सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण और जरूरी है.

देशभर के डॉक्टर सोमवार यानि की आज सुबह के 6 बजे से मंगलवार सुबह 6 बजे तक हड़ताल पर हैं. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने रविवार को कहा कि वह पहले से घोषित हड़ताल के फैसले पर कायम है.आईएमए ने यह फैसला पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की पिटाई के बाद चल रहे आंदोलन के समर्थन में किया है. आईएमए ने कहा कि बंगाल के डॉक्टरों के समर्थन और चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून की मांग को लेकर सोमवार को एक दिन की हड़ताल का आह्वान किया गया है. लेकिन आपात सेवाएं इससे बाहर रहेंगी. हालांकि दिल्ली एम्स हड़ताल ने इससे अलग रहने का फैसला किया है.

एम्स नहीं है शामिल

हड़ताल में दिल्ली-एनसीआर की सभी अस्पताल और डॉक्टर शामिल हुए हैं, लेकिन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में सामान्य कामकाज हो रहा है. एम्स के मुताबिक डॉक्टर आंदोलन के समर्थन में काली पट्टी बांध कर विरोध दर्ज कर रहे है, लेकिन आज के दिन (सोमवार) भी आम दिनों की तरह ओपीडी में मरीजों का इलाज हो रहा है.

बंगाल के डॉक्टरों ने सरकार के सामने शर्त रखी

पश्चिम बंगाल में आंदोलन कर रहे डॉक्टरों ने रविवार को अपने रुख में नरमी लाते हुए कहा कि वो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बातचीत करने को तैयार हैं. राज्य में आंदोलन का समन्वय कर रहे जूनियर डॉक्टर फोरम के प्रवक्ता ने कहा कि हम अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत करने को तैयार हैं. मुख्यमंत्री स्थान तय करें लेकिन बातचीत के दौरान मीडिया कवरेज की इजाजत दी जानी चाहिए, इससे पहले फोरम ने बंद कमरे में बातचीत करने के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.

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