सरकार को किसान संगठनों का लिखित जवाब- आंदोलन को न करें बदनाम

केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन लगातार बढ़ता जा रहा है। देश के कई हिस्सों से राजधानी पहुंचे किसान दिल्ली के बॉर्डरों पर डेरा जमाए हुए हैं। आंदोलन का आज 21 वां दिन है लेकिन अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

कोरोना वायरस महामारी और इस कड़ाके की खंड में किसान सड़कों पर अपनी रातें बिताने को बेवस है। पिछले दिनों बीजेपी नेताओं सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने किसान आंदोलन को लेकर हमला बोला था। किसी ने उन्हें खालिस्तानी बताया तो किसी ने यह भी कहा कि इस आंदोलन के पीछे देश विरोधी ताकत, विपक्षी दल और पाकिस्तान का हाथ है। इसी बीच बुधवार को किसान मोर्चा ने सरकार को लिखित जवाब देते हुए अपील की है कि आंदोलन को बदनाम न किया जाए। केंद्र सरकार द्वारा किसान संगठनों के सामने गए लिखित प्रस्ताव के जवाब में ये चिट्ठी लिखी गई है।

सरकार के प्रस्ताव को किया अस्वीकार

किसान मोर्चा ने कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल को यह चिट्ठी ​भेजी है। संगठन ने लिखा है कि ‘आपसे प्राप्त किए गए प्रस्ताव और पत्र के संदर्भ में आपके माध्यम से सरकार को सूचित करना चाहते हैं कि किसान संगठनों ने उसी दिन एक संयुक्त बैठक की और आपकी तरफ से दिए गए प्रस्ताव पर चर्चा की और इसे अस्वीकार कर दिया। क्योंकि 5 दिसंबर को 2020 को सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा मौखिक प्रस्ताव का ही लिखित प्रारुप था।‘

किसान संगठन ने आगे लिखा कि ‘हम अपनी मूल बातें पहले ही विभिन्न दौर की बातचीत में मौखिक तौर पर रख चुके थे, इसलिए लिखित जवाब नहीं दिया। हम चाहते हैं कि सरकार किसान आंदोलन को बदनाम करना बंद करे औऱ दूसरे किसान संगठनों से समानांतर वार्ता बंद करे।‘

आंदोलन का आज 21वां दिन

बता दें, पिछले कई महीनों से इस नए कृषि कानून को लेकर आंदोलन चल रहा है। लेकिन पिछले 20 दिनों से किसान दिल्ली की बॉर्डरों पर डेरा जमाया हुए हैं। सरकार और किसान संगठनों के बीच 6 दौरे की बैठक हो चुकी है, लेकिन अभी भी नतीजा काफी दूर दिख रहा है। केंद्र सरकार इन दिनों कई राज्यों के किसान संगठनों से बात कर रही है।

कुछ राज्यों के किसान संगठनों ने इस कानून का समर्थन किया है और किसानों के हित में बताया हैं। तो वहीं, दूसरी ओर सरकार आंदोलन कर रहे किसानों को समझाने में अभी तक नाकाम साबित हुई है। खबरों के मुताबिक पिछले कुछ समय से आंदोलन कर रहे किसान संगठन औऱ सरकार के बीच में कोई आधिकारिक वार्ता नहीं हुई है।

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