किसान आंदोलन पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने दी प्रतिक्रिया, कहा- किसानों को अपमानित नहीं किया जा सकता है

किसान आंदोलन को लेकर देश में सियासत चरम पर है। केंद्र सरकार विपक्षी पार्टियों के निशाने पर है। किसान पिछले 67 दिनों से केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों ने सरकार से फिर से बातचीत शुरु कराने की बात कही है। इसी बीच मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी किसान आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि किसानों का अपमान नहीं किया जा सकता है और ना ही उन्हें वापस जाने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार को किसानों से बात करने और जल्द से जल्द इस मामले का समाधान निकालने की अपील की है।

अगर सरकार की मंशा है तो इसे सुलझाया जा सकता है

बीते दिन रविवार को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इरादे दिखाती है तो इस मुद्दे को हल किया जा सकता है। पश्चिमी यूपी के किसान नेताओं ने कहा कि वो इस मुद्दे को सुलझाने के लिए खुले हैं। किसान तैयार हैं, अगर सरकार की मंशा है तो इसे सुलझाया जा सकता है।

उन्होंने कहा, इस हफ्ते की शुरुआत में यूपी पुलिस की ओर से आंदोलनकारी किसानों को गाजियाबाद से बाहर निकालने के प्रयास से स्थिति और ज्यादा खराब हो गई। खबरों के मुताबिक सत्यपाल मलिक ने कहा है कि मुझे इस तरह की कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, लेकिन यह किसानों का मुद्दा है और मैं चुप नहीं रह सकता। मैंने पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात कर इस मुद्दे को तुरंत हल करने का अनुरोध किया है।

सार्वजनिक रुप से विचार रखने में अड़चने…

सत्यपाल मलिक ने कहा है कि किसानों को अपमानित करके वापस नहीं भेजा जा सकता है। आप उन्हें अपमानित नहीं कर सकते और ना ही उन्हें विरोध प्रदर्शनों से वापस भेज सकते हैं। आपको उन्हें बातचीत में शामिल करना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि मुझे सार्वजनिक रूप से अपने विचार व्यक्त करने में अड़चनें हैं, लेकिन मैं अपने विचार गृह मंत्री और प्रधानमंत्री तक पहुंचा चुका हूं। वो स्थिति से अवगत हैं, लेकिन मुझे अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

100 से ज्यादा किसानों की हो चुकी है मौत

बता दें, दिल्ली के सिंघु, टिकरी और गाजीपुर ब़ॉर्डर पर लाखों की संख्या में किसान सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान नेता और सरकार के बीच 12 दौरे की बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक किसी भी तरह का समाधान नहीं निकल पाया है। किसान एमसएसपी पर कानून बनाने की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। अभी तक 100 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती, तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे।

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