किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाल कर किया कृषि बिल का विरोध, कहा- लंबे समय तक प्रदर्शन के लिए तैयार

देश में चल रहे किसान आंदोलन पर आय दिन कुछ न कुछ ख़बरें निकल कर आ ही जाती हैं, लेकिन इस बार का नजारा बिलकुल अलग ही है। दरअसल देश में किसानों ने केंद्र सरकार के द्वारा लाये गए नए कृषि कानून के ख़िलाफ़ बिलकुल ही अलग अंदाज में प्रदर्शन का रुख अपनाया है।

किसानों ने दिल्ली के आस पास के सभी राज्यों के हाईवे से ट्रैक्टर मार्च का आयोजन किया है. ट्रैक्टर मार्च के जरिये किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन कर रहें हैं। किसानों का कहना है कि सरकार और जनता इस रैली/ मार्च को आगामी 26 जनवरी की परेड की “रिहर्सल” की तौर पर देखें।

अनुमानित आंकड़ों के अनुसार इस ट्रैक्टर मार्च के दौरान लगभग 2,500 ट्रैक्टर एक्सप्रेस अलग -अलग हाईवे पर हो सकते हैं । हरियाणा के अन्य हिस्सों में भी किसान केंद्रीय कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए ट्रैक्टर मार्च कर रहें हैं । सिंघू सीमा जहां किसान 26 नवंबर से ही डेरा जमाए हुए हैं,वहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए योगेंद्र यादव जो एक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं और संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य ने शुक्रवार को कहा कि ट्रैक्टर मार्च सिंघू, टिकरी और गाजीपुर सीमाओं और रेवासा से निकाले जाएंगे।

इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने कहा, “इसे 26 जनवरी को होने वाले परेड के पूर्वाभ्यास के रूप में देखा जा सकता है।” किसानों के नेता राकेश टिकैत ने मिडिया से बात करते हुए कहा की सरकार को समझने के लिए हम शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन कर रहें है जिससे किसी को भी कोई नुकसान नहीं होगा, और हमारी ओर से इस बात का पूरा ख्याल रखा गया है।

राकेश टिकैत ने यह भी बताया की ट्रैक्टर मार्च के दौरान अलीगढ में किसानों के द्वारा एक लंगड़ का आयोजन भी होना है। गौरतलब है कि ट्रैक्टर मार्च सरकार के साथ नए चरण की बातचीत से एक दिन पहले निर्धारित किया गया है, इसके पहले भी कई दफ़ा सरकार और किसानों के बीच बातचीत की जा चुकी है। सोमवार को दो प्रमुख मांगों पर आठवें दौर की वार्ता का प्रस्ताव स्वीकार किया गया है – नए अधिनियमित कानूनों को निरस्त करना और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी का प्रावधान।

क्या रही प्रसाशन की प्रतिक्रिया ?

जहाँ एक ओर किसान अपने विरोध प्रदर्शन से लाख समस्या आने पर भी पीछे हटने का नाम नहीं ले रहें वहीँ किसानों के इन बुलंद इरादों को देख सरकार और प्रसाशन भी सकते में हैं। 26 नवंबर से चल रहे इस आंदोलन में प्रसाशन से लेकर प्रकृति तक सभी के सितम झेले हैं देश के किसानों ने। लेकिन फिर भी प्रसाशन को डर है की कहीं यह विरोध आक्रामक न हो जाये जिसको मद्देनजर रखते हुए सभी राज्यों, जिलों और केंद्र स्तरीय नेताओं और पदाधिकारियों की और से किसानो से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए अनुरोध की जा रही है।

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने गुरुवार को आंदोलन कर रहे किसानों से विरोध मार्च को शांतिपूर्ण रखने की अपील की और जोर देकर कहा कि सरकार कल एक प्रस्ताव को लेकर आशान्वित थी।

-दिल्ली: बुराड़ी में किसानों के ट्रैक्टर मार्च को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उत्तर-पश्चिम की DCP ने बताया, ‘हमारी टीम तैनात है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। हम किसान संगठनों से भी बात कर रहे हैं कि अब तक जैसे उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया वैसे आगे भी करते रहें।’

-गाजियाबाद के एडीएम (सिटी) शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा है कि यहां की गाड़ियां नोएडा जाकर वहां से गाज़ीपुर बॉर्डर वापस आएंगी। हमारी तरफ से पूरी व्यवस्था की गई है। हम सभी चीज़ो का वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं और हम लगातार इनके संपर्क में है।

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