क्या है जॉर्ज फ्लॉयड का मामला जिसके चक्कर में जल उठा अमेरिका ?

कोरोना की मार झेलते हुए महाशक्ति देश अमेरिका को एक और मुसीबत ने आ घेरा है. यह मुद्दा है अश्वेत लोगों पर की जाने वाली अमानवीय व्यवहार.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुद्दे पर बुरी तरह घिड़ते हुये नज़र आ रहे हैं. दरअसल, 1 जून की शाम को वाइट हाउस के सामने प्रदर्शन बेकाबू होने के चलते ट्रम्प को बंकर के माध्यम से बाहर निकाला गया.

क्या है मामला ?

अमेरिका में अश्‍वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद जो कुछ देखने को मिल रहा है वो वहां पर पहली बार नहीं हो रहा है. अपने को साधन संपन्‍न और हाईटेक मानने वाले अमेरिकियों की हकीकत का एक कड़वा सच ये भी है कि वहां पर वर्षों से अश्‍वेतों के साथ ऐसा ही होता रहा है.

अश्‍वेतों के खिलाफ होने वाले जुल्‍मों का इतिहास यहां पर काफी पुराना है. माना जा रहा था कि बराक ओबामा के राष्‍ट्रपति चुने जाने के बाद इस तरह की घटनाएं आगे नहीं होंगी, लेकिन ये न पहले रुकीं न अब. आपको बता दें कि ओबामा अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति थे. वे पहले अफ्रीकी-अमेरिकन थे जो राष्ट्रपति बने. इसको उस वक्‍त दुनिया के सबसे बड़ी ताकत में खुलेपन की बहुत बड़ी मिसाल कहा गया था.

पूरा वाक्या

बीते 25 मई को एक अश्वेत अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड के गले को अपने घुटने से दबाकर उसे मौत के घाट उतारने वाले मिनीपोलिस के श्वेत पुलिस अधिकारी डेरेक चाउविन को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया और उस पर हत्या का आरोप लगाया गया है.

इस घटना ने अमेरिका में एक बार फिर से अफ्रीकी-अमेरिकी अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों के भेदभाव को उजागर कर दिया है. एक वीडियो में पुलिस अधिकारी को घुटने से जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन दबाते हुए देखा गया. फ्लॉयड की बाद में चोट के कारण मौत हो गई थी. यह वीडियो एक राहगीर ने बनाया था. अश्वेत फ्लॉयड को एक दुकान में नकली बिल का इस्तेमाल करने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था.

वीडियो में दिख रहा है कि अधिकारी कम से कम आठ मिनट तक अपने घुटने से व्यक्ति की गर्दन दबाए रखता है. इस दौरान व्यक्ति सांस रुकने की बात कहता नजर आता है. वीडियो में दिखता है कि व्यक्ति का हिलना-डुलना और बोलना बंद हो जाने पर भी पुलिस अधिकारी डेरेक चाउविन अपना घुटना नहीं हटाता है.

श्वेत अधिकारी डेरेक चाउविन को गिरफ्तार कर लिया गया है तथा उस पर शुक्रवार को थर्ड डिग्री हत्या और मानववध का आरोप लगाया गया है. चाउविन के साथ उन तीन अन्य अधिकारियों को भी बर्खास्त कर दिया गया जो घटनास्थल पर मौजूद थे. हत्या का दोषी पाए जाने पर चाउविन को 12 साल से अधिक जेल की सजा होगी.

फ्लॉयड की मौत के विरोध में अमेरिका के कई शहरों में कर्फ्यू का उल्लंघन कर हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. प्रदर्शनकारियों ने शहर के कुछ हिस्सों में लूट और आगजनी की वारदात को अंजाम दिया.

मिनीपोलिस में प्रदर्शनकारियों ने कारों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में आग लगा दी और दुकानों में घुस गए जिसके बाद उन पर काबू पाने के लिए अधिकारियों ने आंसू गैस के गोले दागे और रबड़ की गोलियां चलाईं. गुरुवार को दंगाइयों ने मिनीपोलिस की उस पुलिस चौकी को फूंक दिया जहां फ्लॉयड को गिरफ्तार किया गया था.

मिनीपोलिस में सुरक्षा चिंताओं के चलते रेल और बस सेवाएं बाधित हुई हैं. सेंट पॉल में धुएं का गुबार उठता देखा गया. कई जगह लगाई गई आग को बुझाने के लिए दमकल दस्तों को मशक्कत करनी पड़ी. वाशिंगटन डीसी, अटलांटा, फिनिक्स, डेनवर और लॉस एंजिलिस समेत कुछ शहरों में इसने हिंसक रूप ले लिया.

फिनिक्स, डेनवर, लास वेगास, लॉस एंजिलिस और कई अन्य शहरों में हजारों प्रदर्शनकारियों के हाथों में पोस्टर थे जिनपर लिखा था, ‘उसने कहा, मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं. जॉर्ज के लिए न्याय.’उन्होंने नारे लगाए, ‘न्याय नहीं, शांति नहीं’ और कहा, ‘उसका नाम पुकारो. जॉर्ज फ्लॉयड.’

अटलांटा में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के कुछ घंटे बाद कुछ प्रदर्शनकारी अचानक हिंसक हो गए, पुलिस की कार तोड़ने लगे, एक कार को आग लगा दी.

राइटर व्यू

एक तरफ दुनियां कोरोना की महामारी से झूझ रही उसके बाद इस तरह के दंगे खुले घाव पर नाख़ून घुसाने के बराबर हैं, लॉक डाउन की वजह से बाज़ारों में सामानों की कमी ऊपर से इस तरह से अमानवीय हरकत फिर दंगे, आख़िर कौन तय कर सकता है कि विरोध का कौन सा ढंग बेहतर है?

बंद से अर्थव्यवस्था को नुक़सान होता है, धरने से कभी ट्रैफ़िक की समस्या तो कभी लॉ एंड ऑर्डर में दिक्कत आती है. हड़ताल होने से कभी-कभार बाज़ार में ज़रूरी चीज़ें नहीं मिलती और तो भूख हड़ताल से किसी की मृत्यु भी हो सकती है.

लेकिन अगर ये सब लोग चुप रह जाएँगे तब तो अन्याय निश्चित है, विरोध करने से न्याय की सम्भावना के तो आसार बनते हैं. बोलना और प्रोटेस्ट्स करना आपके मौलिक अधिकार हैं और उनमें अपनी आस्था ना रखना आपको एक नागरिक के तौर पर बदल कर, कमज़ोर और यथास्थितिवादी बना सकता है. अमेरिका में अश्वेतों के आंदोलन से भारत में हालिया आंदोलनों तक आपके विरोध करने के नागरिक अधिकारों को लेकर सवाल खड़े हो गए है.

एक डॉक्टर या एक नर्स जब अपने मरीज़ की जान बचाता है तो वह यह नहीं देखता वह श्वेत है या अश्वेत, या जब एक इंसान एक चिकित्सक के पास जाता ह तब वो यह नहीं देखता की वो किस रंग का है. धरती को अच्छे इंसान की जरूरत है , मानवता को एक अच्छे इंसान की तलाश है ना कि काले या गोरे की. मेरे अपने विचार से हर एक इंसान की ज़िंदगी क़ीमती है और उसे लेने का हक सिर्फ़ उस बर्ह्म का है जिसने उसे बनाया है.

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