पांच सेकंड में अमृतसर ने मौत का वो मंजर देखा जो हिंदुस्तान ने पहले कभी नहीं देखा

पंजाब के अमृतसर ट्रेन हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. मौत का ये खौफनाक मंजर जिसने भी देखा उसकी रूह कांप गई. हादसे के बाद जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, वो बेहद डरावने हैं. रावण दहन देख रहे लोगों के ऊपर से ट्रेन गुजर गई और इन पांच सेकंड में अमृतसर ने मौत का वो मंजर देखा जो हिंदुस्तान ने पहले कभी नहीं देखा था. अमृतसर रेल हादसे में मारे गए 61 लोग हिंदुस्तान से यही सवाल करते हैं कि हमारी मौतों का जिम्मेदार कौन है.

एक ऐसा रेल हादसा जो ना इस देश कभी देखा और ना कभी सुना. मौत आई और पटरी पर लाशें बिछती चली गईं. मौत का वो खौफनाक मंजर जिसने भी देखा रूह कांप उठी. वो पांच सेकंड और सिसकती रह गई सैंकड़ों ज़िंदगियां. जो बच गए उनका भी और मर गए उनका भी, सभी का एक ही सवाल है, इस मुल्क के रहनुमाओं इस हादसे का जिम्मेदार कौन हैं. यहां एक जिम्मेदार नहीं है, यहां तो रावण से रेल तक, निज़ाम से भगवान तक, रेलवे से सरकार तक,पुलिस से प्रशासन तक.

कयामत की इस रात के सैंकड़ों जिम्मेदार हैं और इन लाशों का जवाब इस मुल्क को देना पड़ेगा. एक नहीं सैंकड़ों सवाल हैं, मौत नहीं ये नरहंसार हैं, ये हादसा नहीं है, ये हत्याएं हैं. वो हत्याएं जो जिम्मेदारों की लापरवाही से हुई. सबसे पहले इन मौतों का जिम्मेदार रावण दहन के कार्यक्रम को कराने वाले आयोजक हैं.

मौत का मातम मनाते पंजाब को प्रशासन की लापरवाही ने वो जख्म दिए हैं, जिन्हें भरने में सदियां निकल जाएंगी. इसके बाद सबसे बड़ा जिम्मेदार रेलवे हैं, जवाब रेलवे को भी देना होगा, कि रेलवे ने खूनी ट्रेन को पटरी पर क्यों उतारा. इंसानों को कुचलता रेलवे इन आँखों में आँखें डालकर जवाब दे, कि इनकी खुशियों का कातिल कौन है, इन मौतों का जिम्मेदार कौन हैं. ये सवाल इसलिए है, क्योंकि लापरवाहियों और हादसों के लिए बदनाम रेलवे हर बार हादसों पर सफाई देता है, और देश को जांच के चक्र में फंसाकर निकल जाता है.

इस सबके बाद सवाल सरकार से हैं, क्योंकि बताया गया है, कि कार्यक्रम को कराने वाले लोग कांग्रेसी हैं, सवालों के घेरे में अमरिंदर कैबिनेट के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर भी हैं…क्योंकि जिस वक्त ये हादसा हुआ, नवजोत कौर रावण दहन कार्यक्रम के मंच पर मौजूद थीं और जिस जगह ये समारोह आयोजित किया गया वह नवजोत सिंह सिद्धू के विधानसभा क्षेत्र में आता है.

हालांकि एक चश्मदीद ने तो ये भी आरोप लगाया है, कि जब ट्रेन लाशों को बिछाती हुआ गुजर गई तो नवजौत कौर वहां से निकल गई थी. ताज्जुब की बात ये है कि यहां सालों से यूं ही रावण दहन होता रहा है. यानी सालों से हादसे का इंतजार किया जा रहा था. स्थानीय प्रशासन या तो खतरे की अनदेखी करता रहा या फिर उसे इतनी छोटी सी बात समझ में नहीं आई कि रावण दहन का कार्यक्रम कराना कितना खतरनाक था.

अब रेलवे, स्थानीय प्रशासन, सांसद-सरकार, सब एक-दूसरे पर टोपी ट्रांसफर कर रहे हैं. अमृतसर अपनी गोद में बिछी लाशों पर आंसू बहा रहा है, पंजाब भयावह शाम के आने से सिसक रहा है, और बचा बेचारा हिंदुस्तान, वो लापरवाही की मौतों का मातम मना रहा है.

पंजाब का अमृतसर दशहरे के दिन रावण को जलाने आया था लेकिन ये खौफनाक दिन वो दर्द लेकर आया जिसने पूरे हिंदुस्तान का सीना छलनी कर दिया. अमृतसर में जोड़ा फाटक के पास एक तरफ रावण जल रहा था और दूसरी ओर रेलवे ट्रैक पर खड़े लोगों के ऊपर से जालंधर एक्सप्रेस गुजर रही थी. मात्र इन 5 सेकंड में जलते हुए रावण ने वो मंजर देखा जो दर्द का इतिहास बन गया.

मौत का मातम मनाते इन लोगों ने पटरी से अपने परिवारों के कटे अंगों को उठाया है. कहीं पैर कटे थे, तो कही टांगें पड़ी थी, कहीं सर दिख रहा था, तो कहीं धड़ तड़प रहा था. ट्रेन आई और निकल गई. ट्रेन के बीतने के बाद पटरी पर लाशें बिछी हुई थीं. जहां तक नज़र जाती कराहते हुए इंसान थे, कोई तड़प रहा था, कोई लहुलुहान था, कोई मां अपने बच्चे को उठाए थी. तो बेटा अपनी मां से शव को खोज रहा था.

रावण दहन देखने आए ये लोग परिवारों के साथ आए थे. कोई पिता अपने बच्चों को कंधे पर बिठाकर लाया था, कोई बेटा बूढ़ी मां को रावण दिखाने लाया था, तो कई लोग अपने परिवारों के साथ आए थे. नन्हें नन्हें बच्चे भी थे, औरतें, बूढ़े, यूवा सभी इंसानों के ऊपर से ट्रेन गुजरती गई. कुछ सेकंडो पहले जो लोग रावण के जलने की खुशी में नाच रहे थे, पांच सेंकड में वो लोग पटरी पर पड़े हुए तड़प रहे थे.

खूनी ट्रेन की खबर सुनकर सभी लोग ट्रैक की तरफ दौड़ पड़े थे, लाशों को उठा उठाकर पहचाने की कोशिश हो रही थी, अपनों की तलाश में आए इन लोगों की सहमीं हुई चीखों इतनी दर्दनाक थी, कि आंखों से समंदर छलक पड़ा था, और भगवान से रहम की भीख मांगी जा रही थी. कि भगवान हमारा गुनाह क्या था. कि खौफनाक मौत क्यों मिली.
अस्पताल के मुर्दाघर में शवों को पहचानने के लिए लोग लाईन में लगे थे. इन सहमी हुई जुबानों से धरती कांप रही है, आसमान भी इस दर्द पर सहम गया और हमारे देश की सियासत के लिए ये मुद्दा बना है सियासत का. एक दूसरे को घेरना शुरू हो गया, और मौतों के आंकड़ों पर सियासी बेहयाई शुरू हो गई. सरकारों ने लाशों की संख्या पता की और मुआवजे का एलान शुरू कर दिया

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