नए कृषि कानूनों पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को बीजेपी की खुली चुनौती

नए कृषि कानून और किसान आंदोलन को लेकर देश में सियासी पारा उफान पर है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के बीच बयाबाजियों का दौर जारी है। AAP किसान आंदोलन को समर्थन देते हुए नए कृषि कानूनों को लगातार रद्द करने की मांग कर रही है। बीते दिन रविवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दूसरी बार सिंघु बॉर्डर पहुंचे थे, जहां पर उन्होंने कीर्तन दरबार में हिस्सा लिया और इन कानूनों के विरोध में केंद्र सरकार पर हमला बोला। इसी बीच दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और नई दिल्ली से बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को निशाने पर लिया है।

केजरीवाल को समझाएंगे कानून के फायदे…

बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा है कि कृषि कानूनों को लेकर केजरीवाल के संदेह को दूर करने के लिए हम तैयार हैं। उन्हें कृषि कानूनों के संदेह को दूर करने के लिए आमंत्रित किया था लेकिन वो आए नहीं। बीजेपी नेता ने खुली चुनौती दी है कि अगर केजरीवाल नहीं आ सकते हैं तो अपनी सुविधा के मुताबिक समय और स्थान बताएं, हम वहां आकर कानून के फायदे समझा देंगे।

वहीं, दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि दूसरे राज्यों में जाकर सीएम केजरीवाल कहते हैं कि कृषि कानून से कोई फायदा नहीं है और जब आज उनको समझाने के लिए बुलाया तो आए नहीं। उन्होंने आगे कहा कि 23 नवंबर को केजरीवाल ने तीनों कृषि कानून में से एक कानून को नोटिफाई किया था और अब इन कानूनों का विरोध कर खुद को किसान हितैषी साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।

केजरीवाल ने फाड़ी थी नए कृषि बिल की कॉपी

बता दें, इन नए कृषि कानूनों को लेकर आम आदमी पार्टी शुरु से ही केंद्र सरकार पर हमलावर है। पिछले दिनों दिल्ली विधानसभा में सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस नए बिल की कॉपी फाड़ दी थी। बीते दिन रविवार को वह गुरु गोविंद सिंह के चार बेटों व माता गुजरी जी की शहादत पर दिल्ली सरकार की पंजाब एकेडमी द्वारा आयोजित किए गए कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। इस दौरान उन्होंने नए कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला।

उन्होंने कहा,’अभी केंद्र सरकार ने अपने सारे बड़े-बड़े नेताओं को मैदान में उतार दिया है। इनके सारे मंत्री और मुख्यमंत्री मैदान में आकर भाषण दे रहे हैं कि इस कानून से किसानों का फायदा है। मैंने इनके सारे भाषण सुने हैं, अभी तक मुझे इनका एक भी नेता नहीं मिला, जो यह बता सके कि इस कानून से किसानों को क्या फायदा होगा। गूगल और यूट्यूब पर जाकर आप भी सुन लेना, जितने ये बड़े-बड़े नेता आते हैं, वो सारे कहते हैं कि इससे किसानों की जमीन नहीं जाएगी। यह कोई फायदा हुआ? जमीन तो आज भी किसानों के पास ही है।’

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