केरल पढ़े-लिखों की श्रेणी में सबसे ऊपर जरूर है लेकिन आज भी उसे सोंच बदलने की जरूरत है

अगर आपको को ये पता चले कि कहीं किसी मंदिर में उस स्त्री का जाना मना है जिसे रजस्वला (मासिक धर्म) आते हो तो संभवतः आपका खून खौल उठेगा । अगर आप वाकई में प्रबुद्ध हैं, केरल की तरह पढ़े-लिखे गवारो की श्रेणी में नही हैं तो ये सोचने पर मजबूर जरूर हो जाएंगे कि ये किस तरह का समाज है और आपका सबसे पहला सवाल होगा कि क्या ये 21वीं सदी का भारत है तो मैं कहूंगा जी हां ये 21वीं सदी का भारत हीं है जहां आपको इस तरह की वाहियात चीज़ें सुनने को मिलती हैं ।

ये वही भारत है जहां अगर एक मंदिर के अंदर स्त्री प्रवेश करती है तो वो मंदिर अशुद्ध हो जाता है, उसके प्रवेश पर कोर्ट के फैसले को भी ताक पर रख दिया जाता है और जब अपने अधिकार के मुताबिक दो महिलाएं मंदिर में प्रवेश करती हैं तो दंगा भड़काया जाता है, उन्हें अपमानित किया जाता है और फिर यहां से शुरु होती है हमारे देश के नेताओ की गंदी और दोगली राजनीति ।

आखिर ऐसा क्यों है कि एक तरफ हमारा समाज खुद को शिक्षित घोषित करने में तुला रहता है तो दूसरी तरफ इस तरह की वाहियात सोंच रखता है अगर ऐसी सोंच वाला समाज खुद को पढ़ा लिखा कह कर नवाजती है तो मुझे नहीं चाहिए ऐसा तमगा, फिर तो इस समाज को अनपढ़ ही होना सही है या फिर ये पढ़े-लिखे का तमगा ढ़ोने वाले लोग पढ़े-लिखे गवार है ।

केरल में एक मंदिर है जिसका नाम है सबरीमाला । इस मंदिर में अय्यप्पा स्वामी को स्थापित किया गया है । कहा जाता है कि अय्यप्पा स्वामी ब्रह्मचारी थे । महज यही वो कारण है कि इस मंदिर में स्त्रीयों का प्रवेश वर्जित है । ये तो हुई धर्म की बात अब शिक्षा की बात करें तो करेल ताजा खबरों के मुताबिक 100 फीसदी पढ़ा-लिखा राज्य है । ये वही केरल है जहां 96 साल की दादी परीक्षा में अव्वल आती हैं ।

क्यों नहीं जा सकती महिलाएं सबरीमाला मंदिर के अंदर, क्या है इसका इतिहास ?

अब आप सोंच सकते हैं कि यह किस तरह का पढ़ा-लिखा राज्य है जहाँ आज भी महिला के रजस्वला के कारण उसे अशुद्ध करार दिया जाता है और उसे मंदिर में प्रवेश करने पर रोक लगा दिया जाता है । यहां किस तरह के पढ़े लिखे लोग हैं जो कोर्ट के फैसले को भी ताक पर रख देते हैं । अगर पढ़ा-लिखा व्यक्ति ऐसे परिभाषित होता है तो फिर अनपढ़ व्यक्ति कैसे परिभाषित होगा !

आपको बता दें कि केरल वो राज्य है जहां मातृ भाषा की जगह अंग्रेजी का प्रचलन है या फिर स्थानिय भाषा की और हमारे देश मे एक विडंबना है कि अंग्रेजी बोलने वाले लोग-पढ़े लिखे की श्रेणी में आते हैं । मुझे लगता है केरल पढ़े लिखों की श्रेणी में सबसे ऊपर जरूर है लेकिन सोंच में वो उन राज्यों ज्यादा पीछे है जहां की शिक्षा ग्राफ 50 फीसदी से भी कम है । मुझे लगता है प्रबुद्ध केरल को अपनी सोंच बदलने की ज़रूरत है क्योंकि स्त्री से ही हम हैं ना कि हम से स्त्री है ।

Facebook Comments

Rahul Tiwari

राहुल तिवारी 2 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वो इंडिया न्यूज़ में भी काम कर चुके हैं.

Leave a Reply