किसानों के ट्रैक्टर परेड को लेकर कृषि मंत्री की अपील, कहा- बड़ी कुर्बानी के बाद देश को आजादी मिली है, किसान…

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन तेज है। राजधानी दिल्ली की बॉर्डरों पर किसान पिछले 54 दिन से आंदोलन कर रहे है और सरकार से इस कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी कदम बढ़ा दिए है। सुप्रीम कोर्ट की ओऱ से एक कमेटी गठित की गई है जो दो महीने में अपना रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेगी। कोर्ट ने फिलहाल केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानून के अमल पर रोक लगा दी है।

किसान नेताओं और सरकार के बीच इस मामले को लेकर कई दौरे की बैठक हो चुकी है। खबरों के मुताबिक किसान 26 जनवरी यानि गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने वाले हैं। इस ट्रैक्टर परेड लेकर जमकर बयानबाजियां हो रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने किसानों से 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड पर फिर से विचार की अपील की है।

‘गणतंत्र दिवस की गरिमा प्रभावित न हो यह जिम्मेदारी किसानों की भी है’

बीते दिन सोमवार को ग्वालियर पहुंचे नरेंद्र सिंह तोमर ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस बात की अपील की। उन्होंने कहा, ‘सभी किसान यूनियनों से आग्रह करता हूं कि 26 जनवरी हमारा गणतंत्र दिवस है, यह राष्ट्रीय त्योहार है, यह आजादी बड़ी कुर्बानी के बाद देश को मिली है, किसानों के किसी भी कदम से गणतंत्र दिवस की गरिमा प्रभावित न हो यह जिम्मेदारी किसानों की भी है। आशा है कि किसान इस पर फिर से विचार करेंगे।’

कृषि मंत्री ने कहा किसानों की माली हालत सुधारने के लिए बीते 6 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ‘किसानी का क्षेत्र फायदे का क्षेत्र बने, नौजवान भी इस ओर आकर्षित हो सकें, किसान टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके महंगी फसलों की ओर जा पाए। इसके लिए दो नए कानून और एक बिल में संशोधन कुल मिलाकर तीन नए कानून बनाए गए हैं। कुछ राज्यों में किसानों को इन कानूनों से आपत्ति है, जो किसान आंदोलन कर रहे हैं।’

बुधवार को 10वे दौरे की बैठक

नरेंद्र सिहं तोमर ने आगे कहा कि ‘किसान यूनियनों से हर बार यह कहा गया है कि वे कानूनों पर चर्चा करें। जिस प्रावधान से किसानों को तकलीफ है, उस पर विचार करने के लिए और उसमे संशोधन करने लिए सरकार खुले मन से चर्चा कर रही है और करना चाहती है। लेकिन यूनियनों की ओर से प्रावधान पर चर्चा नहीं हो पा रही है, इसलिए गतिरोध जारी है।‘ बता दें, सरकार के मंत्रियों और किसान नेताओं के बीच 9 दौरे की बैठक हो चुकी है लेकिन रिजल्ट अभी भी कोसों दूर दिखाई दे रहा है। दोनों पक्षों की आगामी बैठक बुधवार, 20 जनवरी को होने वाली है।

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