प्रकाश पर्व पर पीएम मोदी को नहीं मिला आमंत्रण, कांग्रेस ने जताई आपत्ति, AAP और अकाली दल ने बताया सही फैसला

कृषि कानूनों को लेकर देश में सियासत चरम पर है। देश के कई हिस्सों के किसान दिल्ली के बॉर्डरों पर इस नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। सरकार और किसानों के बीच कई दौरे की बैठक हो चुकी है लेकिन नतीजा अभी भी कोसों दूर दिख रहा है। विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर है। इसी बीच कांग्रेस शासित पंजाब में सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SPGC) के एक फैसले ने सियासत में हड़कंप मचा दिया है।

एसजीपीसी ने सिखों के नौवे गुरु तेगबहादुर के 400 वें प्रकाश पर्व पर पीएम नरेंद्र मोदी को न बुलाने का फैसला लिया है। जिसे लेकर सियासत जोर पकड़ने लगी है। देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एसपीजीसी के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। तो वहीं, आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल ने कमेटी के इस फैसले को बिल्कुल सही करार दिया है।

कांग्रेस ने जताई आपत्ति

कांग्रेस ने कमेटी के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। पंजाब सरकार की ओर से इस बात का दावा किया गया है कि अकाली दल के दबाव में एसपीजीसी ने यह फैसला लिया है। पंजाब सरकार में मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, ‘एसजीपीसी का जो भी कार्यक्रम होता है वो साझा होता है, गुरु तेगबहादुर जी भी पूरे देश के हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री को इस कार्यक्रम में ना बुलाने का फैसला सही नहीं है।‘

उन्होंने आगे कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस कार्यक्रम में बुलाना चाहिए था और उन्हें सिख गुरुओं के द्वारा किसानी को लेकर दी गई शिक्षा और बातें बतानी चाहिए थ, ताकि उन्हें किसानों के दर्द का एहसास कराया जा सके। सुखजिंदर सिंह ने कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर पूरी तरह से बादल परिवार का कब्जा है और उनके दबाव में इस तरह क राजनीतिक फैसला लिया गया है।

जानें, क्या है अकाली दल की प्रतिक्रिया?

दूसरी ओर इस मसले पर सफाई देते हुए अकाली दल के नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि गुरुद्वारा कमेटी एक संवैधानिक धार्मिक संस्था है, जिसके बकायदा चुनाव होते हैं। ऐसे में वो किसे बुलाना चाहती है, तमाम हालात को देखते हुए ही फैसला लिया जाता है और इस बार भी एसजीपीसी ने पूरे हालात को देखते हुए ही ये फैसला लिया होगा और इसमें किसी तरह की राजनीति नहीं है।

चीमा ने कांग्रेस को इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, कांग्रेस के नेता इस मुद्दे को राजनीतिक ना बनाएं, ये एक धार्मिक संस्था की तरफ से लिया गया फैसला है जो कि एक स्वतंत्र संस्था है और अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है।

AAP ने किया समर्थन

वहीं, पंजाब की प्रमुख विपक्षी पार्टी आम आदमी पार्टी ने भी एसपीजीसी के फैसले को सही करार दिया है। AAP का कहना है कि जिस तरह से किसान विरोधी कानून केंद्र सरकार की ओर से लाया गया है, उसका सीधा असर पंजाब के किसानों पर पड़ा है. ऐसे में केंद्र सरकार की ज्यादतियों को देखते हुए किसानों के समर्थन में अगर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने प्रधानमंत्री को अपने कार्यक्रम में नहीं बुलाने का फैसला किया है तो ये बिल्कुल सही है।

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