कविता: भूले ना अपनी ज़िम्मेदारी तभी थमेगी ये महामारी

करे त्राहि-त्राहि दुनिया सारी, कारण जिसका एक बीमारी। सो सबकी जिनको जान प्यारी, वो न लांघे चारदीवारी। समय भले ही

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तुझको क्या चाहिए जिंदगी!

क्यों तू इतना इम्तिहान लेती है आखिर तुझको क्या चाहिए जिंदगी! एक पल की खुशी फिर दर्दों-गम क्यों तू इतना

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ऐसे कैसे यूँ ही हार जाएं हम!

चंद्रशेखर, बिस्मिल, भगत सिंह को पढ़ते आएं हमबताओ एक पल में ऐसे कैसे यूँ ही हार जाएं हम!वक़्त के हालात

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तेरी रूह में उतर कर मैं एक कहानी लिखता हूँ

तेरी रूह में उतर कर मैं एक कहानी लिखता हूँ  । प्यार के अल्फाज़ो से सजाए मैं तेरी नादानी लिखता

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