देश का दुर्भाग्य हैं कि देश के भविष्य के साथ TRP के लिए चाटुकारिता और राजनितिक रोटी सेका जा रहा है

मौत एक दुखद घटना है चाहे वो किसी भी परिस्थिति में हो लेकिन आज देश की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि इस दुखद घटना पर भी राजनीतिक दल और न्यूज़ चैनल TRP खेलने का काम कर रहा है ।

26 जनवरी को तिरंगा यात्रा निकालने के दौरान चंदन गुप्ता नामक 20 वर्षीय युवक की मौत हो जाती है और उस मौत को सम्प्रदायिक घटना का रंग चढ़ा कर सभी राजनीतिक दल और न्यूज़ चैनल TRP खेलने का काम बखूबी शुरु कर देती है जो इस देश के लिए काफी शर्म की बात है । किसकी मौत हुई है उसके मौत से उस युवक के परिजनों की क्या स्थिति है उनके घर मे अब दो वक्त की रोटी कमाने वाला है भी या नही इस बात से किसी को कोई फर्क नही पड़ता बस फर्क पड़ता है तो कैसे अपनी राजनीतिक रोटी सेकी जाए ।

कुछ चाटूकार पत्रकार हैं जो अपने मुद्दे से भटक कर नेताओं की चाटुकारिता करने में मशगूल है तो ऐसे में मुझे लगता है कि उन्हें या तो राजनीति में सक्रीय हो जाएं या फिर किसी भी नेता के पीए बन जाएं ।

दुख तब इस बात की सबसे ज़्यादा होती है जब ऐसे दोहरे चरित्र वाले नेताओं के लिए न्यूज़ चैनल एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन जाता है जहां वो अपनी राजनीतिक रोटी सकते हैं जिसमे मिडिया का एक बड़ा तबका उनका साथ देता है और अपने न्यूज चैनल में इन नेताओं को इस मुद्दे पर बैठा कर बहस करने में मशगूल हो जाते हैं और मुझे ये कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं हो रही है कि कुछ मीडिया वर्ग चाटूकार प्रवृत्ति की हो चुकी है जो ऐसे नेताओं को बैठा कर उन्हें अपना TRP खेलने में मदद कर रही है ।

सारे राजनीतिक दल का कहना है कि तिरंगा यात्रा के दौरान एक देश भक्त की मौत हुई है और ये सुनकर मुझे वाकई में बहुत अच्छा लगा लेकिन साथ ही इस बात का भी दुख हो रहा है कि एक तरफ चंदन गुप्ता को देश भक्त कह कर सम्मानित किया जा रहा है तो दूसरी तरफ उस देश भक्त के नाम पर TRP और राजनीतिक रोटी सेकी जा रही है ।

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क्या किसी पार्टी के वरिष्ठ नेता चंदन गुप्ता के घर जा कर उसके परिजनों से सहानुभूति जताने की कोशिश की, क्या भारत जैसे देश में शाहिद होने वाला महज आज TRP और राजनीतिक रोटी सकने का एक जरिया मात्र बन कर रह गया है ।

The Nation First की पूरी टीम चंदन गुप्ता के मौत पर दुखी है और ऐसे चरित्र वाले नेताओं से एवं न्यूज़ चैनलों से आग्रह करता है कि कृप्या बंद किजीये ऐसी राजनीत जिससे किसी के जख्म भड़ने के बजाए ताजा होती हों अगर कुछ करना ही है तो  उसके परिजनों के साथ खड़े होईये ताकि उसके परिजनों को ये ना लगे कि वो ऐसे दुखद समय मे अकेला है उसे ये लगे कि उसके साथ पूरा देश खड़ा है ।

मौत का कारण कुछ भी हो लेकिन  इस देश में एक युवक की मौत हुई है और इस देश मे कहा जाता है युवा ही देश के भविष्य होते हैं तो देश के भविष्य के साथ कम से कम राजनीतिक तो नही होनी चाहिए ।

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Rahul Tiwari

राहुल तिवारी 2 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वो इंडिया न्यूज़ में भी काम कर चुके हैं.

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