शिकागो यूनिवर्सिटी से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘ट्रोल्स मेरी समझ को तेज करते हैं मेरे मार्गदर्शक जैसे हैं’

किसान आंदोलन को लेकर देश में सिसासी पारा हाई है। विपक्षी पार्टियां केंद्र सरकार पर लगातार हमला बोल रही हैं और किसानों की मांगों को पूरा करने की बात कह रही है। संसद से लेकर महापंचायतों तक केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इन नए कृषि कानूनों का विरोध हो रहा है। देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी इन दिनों महापंचायतों को भी संबोधित कर रहे हैं और केंद्र सरकार पर हमला बोल रहे हैं। बीते दिन राहुल गांधी ने राजस्थान में महापंचायतों को संबोधित किया। जिसके बाद शिकागो यूनिवर्सिटी के दिपेश चक्रवर्ती से बात करते हुए ट्रोल्स समेत कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

ट्रोल्स मेरे मार्गदर्शक जैसे हैं- राहुल गांधी

दिपेश चक्रवर्ती से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘मैं जैसै-जैसे पॉलिटिक्स में आगे बढ़ता हूं मेरी विचारों की लड़ाई तेज़ हो जाती है। इस वजह से जो लोग मेरे विचारों से सहमत नहीं रहते हैं वो मुझ पर लगातार हमले करते रहते हैं। ट्रोल्स द्वारा मुझपर हमला करना मेरी समझ को तेज़ करता है, जब लोग मेरा विरोध करते हैं तो मुझे पता होता है कि मैं सही जगह पर हूं। एक तरह से देखा जाए तो ट्रोल्स मेरे मार्गदर्शक के जैसे हैं जिनसे मुझे पता चलता है कि मुझे क्या करना है। यह एक प्रक्रिया है जो निरंतर आगे बढ़ती रहती है।‘

देश के लिए शुरु से खड़ा रहा है मेरा परिवार कांग्रेस

पॉलिटिक्स को लेकर पूछे गए सवाल पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘अब मैं इस रास्ते पर बहुत आगे बढ़ चुका हूं। हालांकि, अगर आप मुझसे यह सवाल 15-20 साल पहले पूछते कि मैं राजनीति में होने के बारे में क्या सोचता हूं तो मेरा जवाब आज के हिसाब से बिल्कुल अलग होता।‘

राहुल गांधी ने कहा कि मेरा परिवार शुरू से इस देश के लिए खड़ा रहा है। मेरी दादी और मेरे पिता ने देश के लिए अपनी जान देदी। उन्होंने इस देश को बचाने के लिए अपनी जान दे दी। मेरे परिवार का बलिदान मुझे बताता है कि मुझे आगे क्या करना है। मैं उनसे हमेशा सीख लेता हूं।

किसानों का भविष्य छीन रही सरकार

बता दें, राहुल गांधी ने बीते दिन राजस्थान में किसान महापंचायत को संबोधित किया था और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि ‘मोदी जी कहते हैं कि हम किसानों के साथ बात करना चाहते हैं, आप क्या बात करना चाहते हैं? कानूनों को निरस्त करें, किसान आपके साथ बात करेंगे। आप उनकी जमीन, भविष्य को छीन रहे हैं और ऐसे में आप उनसे बात करना चाहते हैं। पहले कानून वापस लें, फिर बात करें।’

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