सरकार के लिए असंतुष्ट छात्र देशद्रोही औऱ किसान दुश्मन, सिर्फ उद्योगपति ही अच्छे दोस्त हैं

नए कृषि क़ानूनों को लेकर देश में सियासत चरम पर है। सत्ताधारी एनडीए गठबंधन और विपक्षी पार्टियों के बीच जमकर बयानबाजियां हो रही है। देश के कई हिस्सों से आए किसान दिल्ली के बॉर्डरों पर डेरा जमाए हुए हैं। अभी तक किसान नेताओं और सरकार के मंत्रियों के बीच कई बार बैठक भी हो चुकी है लेकिन इस मसले का परिणाम निकलता दिखाई नहीं दे रहा है।

खबरों के मुताबिक किसान एमएसपी की गारंटी चाहते हैं। हालांकि सरकार ने इस नए कानून में संशोधन की बात भी कही है लेकिन किसान इस कानून को ही रद्द कराने की मांग पर अड़े हैं। इसी बीच देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर से केंद्र की मोदी सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने मोदी सरकार को उद्योगपतियों का सच्चा दोस्त, जबकि किसानों और नौजवानों को लेकर बेपरवाह बताया है।

सरकार के लिए रेप पीड़ित कोई भी नहीं

राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा है कि ‘मोदी सरकार के लिए असंतुष्ट छात्र देशद्रोही हैं, चिंतित नागरिक शहरी नक्सली हैं, प्रवासी मजदूर कोविड वाहक हैं, रेप पीड़ित कोई भी नहीं हैं, विरोध कर रहे किसान खालिस्तानी हैं और उद्योगपति सच्चे दोस्त हैं।’ दरअसल किसान आंदोलन को लेकर राहुल गांधी पिछले काफी समय से केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। पिछले दिनों उन्होंने किसान आंदोलन को सत्य और असत्य की लड़ाई करार दिया था। साथ ही कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और आम जनता से उन्होंने किसानों के साथ खड़े होने की अपील की थी।

पिछले 19 दिनों से हो रहे हैं प्रदर्शन

बता दें, कोरोना वायरस महामारी और इस भयंकर ठंड के बीच तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान पिछले 19 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे हैं। इसकी वजह से सिंघु, टीकरी, गाजीपुर जैसे बड़े बॉर्डर बंद पड़े हैं। केंद्र सरकार इस कानून को किसानों के हक में बता रही है लेकिन किसान नेताओं के साथ पिछले कुछ दिनों में हुए बैठक में उन्हें संतुष्ट करने में नाकाम रही है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा लॉकडाउन में पास किए गए इस कानून में कई प्रावधान दिए गए है, जिसके तहत किसान मंडी से बाहर भी पूरे देश में कहीं भी अपनी फसल बेच सकते हैं। इसके साथ ही इस कानून के तहत प्राइवेट कंपनियां भी कॉन्ट्रैक्ट के तहत किसानों से खेती करा सकती है। लेकिन इन कानून में एमएसपी को लेकर कोई भी ठोस नियम नहीं हैं। जिसके कारण इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है।

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